पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में आ रहे हैं। भारत के बाहर पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव पर सबसे ज्यादा नजर बांग्लादेश की थी। बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में अगर कोई राजनीतिक गतिविधि होती है तो पड़ोस में उसका असर महसूस किया जाता है।बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर भारत में वर्षों से राजनीति होती रही है और जब इस बार चुनाव के बाद एग्जिट पोल में बीजेपी की जीत की संभावना जताई गई थी तो बांग्लादेश के सांसद ने डर जताते हुए कहा था कि ‘प्रवासियों का सैलाब उमड़ पड़ेगा।’ इसीलिए अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब ‘घुसपैठियों’ के नाम पर भारत और बांग्लादेश के बीच नया राजनीतिक विवाद शुरू होगा?
एग्जिट पोल के बाज बीजेपी की संभावित जीत पर बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टी NCP, जिसका गठन शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद हुआ था उसके सांसद सचिव अख्तर हुसैन ने देश की संसद में कहा था कि अगर पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो देश में लाखों अवैध प्रवासी देश में धकेल दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा था “पश्चिम बंगाल में BJP की जीत से अवैध बांग्लादेशियों को ढाका वापस भेजने का सिलसिला शुरू हो सकता है।”
क्या बांग्लादेशी घुसपैठियों पर होगी कार्रवाई?
अख्तर हुसैन ने बांग्लादेशी संसद में कहा था “अगर पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में BJP की जीत दिखाई देती है और अगर BJP वहां सरकार बनाती है तो वे सभी बांग्लादेशियों को वापस बांग्लादेश भेज देंगे। इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो जाएगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इस तरह के कदम से “प्रवासियों का सैलाब” बांग्लादेश में घुस सकता है और उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुस्लिम प्रवासियों को भारत से वापस नहीं भेजा जाएगा।
उन्होंने ये भी कहा था “हम क्षेत्रीय रूप से कई वास्तविकताओं के बीच स्थित हैं। BJP यह सुनिश्चित कर सकती है कि प्रवासियों का एक सैलाब बांग्लादेश पहुंच जाए। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुसलमानों (अवैध प्रवासियों) को हमारे पड़ोसी देश से वापस नहीं भेजा जाएगा। हमें एकजुट रहना होगा।” दूसरी तरफ बीजेपी के नेताओं ने लगातार बांग्लादेश के अवैध ‘घुसपैठियों’ पर बयान दिए हैं। BJP सांसद निशिकांत दुबे ने बांग्लादेशी सांसद के वीडियो को शेयर करते हुए कहा खा कि टीएमसी के “मददगार धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।
बांग्लादेशी ‘घुसपैठियों’ को निकालना कितना मुश्किल?
2001 में गृह मंत्रालय ने संसद में लगभग 1.2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों का अनुमान बताया था। हालांकि कुछ स्वतंत्र शोधकर्ता और थिंक-टैंक 2026 तक यह संख्या 1.5 से 2 करोड़ के बीच होने का दावा करते हैं। जनवरी 2026 में एक रिसर्च पेपर में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना में जनसांख्यिकीय बदलाव को अक्सर इस घुसपैठ से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन घुसपैठियों को निकालना आसान नहीं होगा। कई घुसपैठिये जाली दस्तावेजों के जरिए खुद को भारतीय नागरिक साबित कर चुके हैं उनकी पहचान करना अत्यंत मुश्किल काम है।
लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत बांग्लादेश से आएगी। बांग्लादेश अगर इन्हें अपना नागरिक मानने से इनकार कर देता है तो फिर भारत क्या करेगा? ये स्थिति दोनों देशों के संबंध को खराब करने की नौबत बन सकती है। अगर बांग्लादेश उन्हें स्वीकार नहीं करता है या अगर उनकी पहचान करने से इनकार कर देता है तो फिर उन्हें कैसे वापस भेजा जाएगा? बांग्लादेश इस मुद्दे को अपनी संप्रभुता और सम्मान से जोड़कर देख रहा है। खासकर 2024 के बाद बांग्लादेश में आए राजनीतिक बदलाव के कारण वहां की सरकार पर भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का घरेलू दबाव है। तारिक रहमान ने भारत से रिश्ते सामान्य करने के संकेत दिए हैं लेकिन घुसपैठ के मुद्दे पर मतभेद शुरू हो सकते हैं।















