मुंबई की दिवालिया एवं कर्ज वसूली कोर्ट ने एसबीआई की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के खिलाफ दिवालिया समाधान योजना शुरू करने की बात कही जा रही है.बैंक ने समूह की दो कंपनियों वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और वीडियोकॉन टेलीकम्यूनिकेशंस के डिफॉल्ट के बाद उसके कर्ज के गारंटर रहे धूत से भी वसूली को लेकर मामला दर्ज कराया था. इस फैसले ने फिर साबित कर दिया है कि लालच ने किस तरह से 50 हजार करोड़ की कंपनी को डुबा दिया है. धूत ने ऐसा क्या किया कि उन्होंने न सिर्फ अपने हजारों करोड़ के साम्राज्य को खत्म कर दिया, बल्कि खुद को भी बर्बाद कर लिया.
साल 1980 से 2000 के दशक में वीडियोकॉन समूह देश के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में गिना जाता था. तब इसका मार्केट कैप करीब 5 अरब डॉलर यानी आज के हिसाब से देखें तो 50 हजार करोड़ रुपये के आसपास था. कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट के क्षेत्र में अच्छा काम कर रही थी, लेकिन इसके प्रमोटर वेणुगोपाल धूत की लालच ने सब गड़बड़ कर दिया और कंपनी पर हजारों करोड़ का कर्ज लद गया. इसका ब्याज नहीं चुका पाने की वजह से कंपनी डिफॉल्ट कर गई और आखिरकार दिवालिया कानून के तहत बिकने की कगार पर आ गई. इसकी वजह से समूह की 33 कंपनियों पर धूत का मालिकाना हक भी लगभग खत्म हो गया.
क्यों बर्बाद हुआ समूह
वीडियोकॉन समूह एक समय टीवी, फ्रिज, एसी जैसे प्रोडक्ट बनाने में सबसे विश्वसनीय माना जाता था. समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बैंकों से बेतहाशा कर्ज लेना शुरू किया. उन्होंने अफ्रीकी देश मोजाम्बिक में तेल ब्लॉक खरीदने के लिए हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया, लेकिन प्रोजेक्ट फेल हो गया. टेलीकॉम सेक्टर में जियो जैसी कंपनी से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सका और यहां भी नुकसान उठाना पड़ा. समूह ने एसबीआई और आईसीआईसीआई जैसे बैंकों से करीब 40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया. इसमें से एसबीआई के कर्ज के लिए धूत ने खुद 8 हजार करोड़ की पर्सनल गारंटी ले ली.
चंदा कोचर मामले ने कर दिया बर्बाद
वीडियोकॉन समूह को मोटा कर्ज दिलाने के लिए धूत ने आईसीआईसीआई बैंक की तत्कालीन चेयरपर्सन चंदा कोचर के साथ मिलकर फ्रॉड किया. इस मामले का खुलासा होने के बाद कोचर का करियर खत्म हो गया और वीडियोकॉन को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा. प्रवर्तन निदेशालय ने भी हजारों करोड़ के फ्रॉड का खुलासा किया जिसमें धूत को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है. साल 2018 में जब वीडियोकॉन समूह के खिलाफ दिवालिया मामला शुरू हुआ तो कर्ज देने वाले बैंकों को भी 90 फीसदी से ज्यादा हेयरकट यानी नुकसान उठाना पड़ा.
धूत पर क्यों चला कोर्ट का डंडा
आपने ज्यादातर कॉरपोरेट कर्ज के मामले में देखा होगा कि लोन कंपनी के नाम पर लिया जाता है और डिफॉल्ट होने पर दिवालिया कानून के तहत उसे बेचकर कर्ज वसूल किया जाता है. लेकिन, वीडियोकॉन के मामले में धूत से एक गलती हो गई. वह एसबीआई से कंपनी को कर्ज दिलाते समय खुद पर्सनल गारंटर बन गए. यही वजह है कि एसबीआई ने एनसीएलटी से धूत के खिलाफ भी दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की डिमांड की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है. 8 अप्रैल को एनसीएलटी की मुंबई कोर्ट ने धूत के खिलाफ पर्सनल इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है.
कैसे होगी धूत से वसूली
एसबीआई की याचिका के अनुसार, वेणुगोपाल धूत के अलावा उनके भाई राजकुमार और प्रदीप धूत पर भी 5 हजार करोड़ से ज्यादा की दिवालिया प्रकिया को शुरू किया गया है. इन पैसों की वसूली के लिए समाधान प्रोफेशनल भी नियुक्त किया जा चुका है. अब धूत परिवार की निजी संपत्तियां जैसे घर, प्रॉपर्टी, बैंक खाते, शेयर, म्यूचुअल फंड, कार व अन्य वाहनों को बेचकर इन पैसों की वसूली की जाएगी. ईडी का मोजाम्बिक केस को लेकर चल रहा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी जारी है, जिसमें फरवरी 2026 में कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. कुल मिलाकर धूत फैमिली चारों तरफ से संकट में घिरी हुई है.















