गन्ना प्रजाति Co-0238 में रोग से बढ़ी चिंता, वैकल्पिक किस्मों को लेकर किसानों और मिलों में टकराव

मुजफ्फरनगर। प्रदेश में गन्ना प्रजाति Co-0238 के रोगग्रस्त होने से किसानों के सामने उपयुक्त वैकल्पिक प्रजातियों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पिछले लगभग दस वर्षों में उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग ऐसी प्रभावी और व्यापक स्तर पर स्वीकार्य वैकल्पिक प्रजाति विकसित और प्रसारित नहीं कर सका, जो Co-0238 का संतोषजनक विकल्प बन सके। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई जनपदों में Co-0238 का रकबा 96 प्रतिशत तक पहुंच गया था, लेकिन आनुपातिक क्षेत्रफल संतुलन बनाए रखने के लिए कोई ठोस रणनीति लागू नहीं की गई। इसका परिणाम अब सामने आ रहा है और पूरी व्यवस्था की इस चूक का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

वर्तमान स्थिति में किसानों, चीनी मिलों और गन्ना विकास विभाग के बीच प्रजातियों को लेकर गंभीर द्वंद की स्थिति बन गई है। अनेक जिलों से शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ चीनी मिलें पर्चों और गोष्ठियों के माध्यम से भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित गन्ना प्रजातियों,जैसे 17018, 18022, 5125, 9709, 13231 और 17215 (PB-95)को अस्वीकृत बताकर किसानों को उनकी बुवाई से रोक रही हैं। इससे किसानों के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। किसान यह तय नहीं कर पा रहे कि वे किस प्रजाति की बुवाई करें और किसकी नहीं, जबकि अधिसूचना स्पष्ट रूप से इन प्रजातियों को मान्यता देती है।

यह भी आरोप सामने आए हैं कि कुछ चीनी मिलें केवल उन्हीं प्रजातियों की सिफारिश कर रही हैं, जिनका बीज वे स्वयं ऊंचे दामों पर उपलब्ध करा रही हैं। यदि यह तथ्य सही हैं तो इसे किसानों के हितों के विपरीत और प्रतिस्पर्धा-विरोधी आचरण माना जा सकता है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है, क्योंकि गन्ना प्रदेश की अर्थव्यवस्था और लाखों किसानों की आजीविका से जुड़ा प्रमुख कृषि उत्पाद है।

फरवरी माह में नौ चीनी मिलों का बंद होना और कई मिलों द्वारा क्षमता से कम पेराई किया जाना भी इस अव्यवस्था का संकेत माना जा रहा है। गन्ना उत्पादन और आपूर्ति की अनिश्चितता के चलते किसान अब वैकल्पिक फसलों—जैसे पॉपुलर, मेंथा और अन्य औषधीय फसलों—की ओर रुख कर रहे हैं। यदि यह रुझान बढ़ता है तो दीर्घकाल में प्रदेश के चीनी उद्योग पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

किसानों ने मांग की है कि जिन चीनी मिलों द्वारा अधिसूचित प्रजातियों के संबंध में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, उनके विरुद्ध तत्काल जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी जिला गन्ना अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित गन्ना प्रजातियों की अद्यतन सूची गन्ना समितियों और जिला गन्ना अधिकारी कार्यालयों में अनिवार्य रूप से चस्पा कराई जाए। प्रत्येक जनपद में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आधिकारिक सूची प्रकाशित की जाए, ताकि किसानों की शंकाओं का समाधान हो सके। इसके अतिरिक्त आनुपातिक रकबा संतुलन के लिए स्पष्ट नीति बनाकर उसका सार्वजनिक क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, ताकि प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।

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