राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में सोमवार सुबह से ही घना स्मॉग और कोहरा छाया रहा, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। ठंड की तीव्रता के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया और दिल्ली का औसत AQI 402 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। प्रदूषण की इस स्थिति ने लोगों की सांसों पर सीधा असर डाला है, वहीं कम दृश्यता के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ। सुबह के समय कई इलाकों में विजिबिलिटी बेहद कम रही, जिससे वाहन चालकों को हेडलाइट और फॉग लाइट के सहारे धीमी गति से चलना पड़ा। कार्यालय जाने वाले लोगों को लंबा समय लगा और स्कूल जाने वाले बच्चों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
घने स्मॉग के कारण आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत जैसी शिकायतें बढ़ गई हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में सांस से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में हवा की गति कम होने और नमी बढ़ने से प्रदूषक तत्व वातावरण में फंस जाते हैं, जिससे स्मॉग की परत और भी घनी हो जाती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और पराली जलाने के अवशेष मिलकर स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।
कम दृश्यता का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कई उड़ानों के समय में देरी हुई और कुछ उड़ानों को वैकल्पिक समय पर संचालित किया गया। यात्रियों को एयरपोर्ट पर अतिरिक्त इंतजार करना पड़ा। रेलवे ट्रैक पर भी कोहरे का असर दिखा और कुछ ट्रेनों की गति धीमी कर दी गई, जिससे उनके समय पर पहुंचने में देरी हुई। सड़क हादसों की आशंका को देखते हुए यातायात पुलिस ने लोगों से सावधानी बरतने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की।
प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यक कदम उठाने की बात कही जा रही है। निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण, पानी का छिड़काव और भारी वाहनों की आवाजाही पर निगरानी जैसे उपायों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और पहले से सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मास्क का उपयोग करने, घर के अंदर रहने और सुबह-शाम की सैर से बचने की अपील की जा रही है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में हवा की रफ्तार बढ़ने या हल्की बारिश की स्थिति बनने पर प्रदूषण से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन तब तक दिल्ली-एनसीआर के लोगों को स्मॉग और ठंड के इस दोहरे प्रहार का सामना करना पड़ेगा। बदलती जलवायु और बढ़ते शहरीकरण के बीच यह स्थिति एक बार फिर साफ संकेत देती है कि प्रदूषण पर स्थायी और प्रभावी नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक उपायों की सख्त जरूरत है।















