मुजफ्फरनगर। द गुरूकुलम इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “शिक्षण में नवाचार एवं मनोविज्ञान से संवर्धन” के दूसरे दिन शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, मनोविज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रभावी उपयोग से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. आर.के. सिंह, प्रशिक्षक भुजेन्द्र कुमार, अंकुर बंसल, अंकित चौधरी, विकास भार्गव, संजय आहूजा, काजल सिंह, रीटा दहिया और प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यशाला में द गुरूकुलम इंटरनेशनल स्कूल, होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज, आदर्श कन्या इंटर कॉलेज, होली वे पब्लिक स्कूल और जी.एस. पब्लिक स्कूल सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के करीब 80 प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने भाग लिया। इस दौरान प्रतिभागियों को नई शिक्षण विधियों, मनोवैज्ञानिक समझ, तकनीकी नवाचार और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। मुख्य अतिथि डॉ. आर.के. सिंह ने कहा कि शिक्षा में नवाचार समय की आवश्यकता है और आज का विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं बल्कि तर्क, जिज्ञासा और व्यवहारिक अनुभव के माध्यम से सीखना चाहता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षण सामग्री तैयार करनी चाहिए ताकि सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके। उन्होंने यह भी कहा कि एक शिक्षक केवल विद्यार्थी ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज के भविष्य का निर्माण करता है। प्रशिक्षक भुजेन्द्र कुमार ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल पाठ्यपुस्तक का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को व्यवहारिक, नैतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक शिक्षा देना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने शिक्षकों से कक्षाओं का वातावरण आनंदमय बनाने, कहानी, कविता, गीत, खेल और समूह चर्चा जैसी गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने तथा बच्चों को डांटने के बजाय सकारात्मक मार्गदर्शन देने का आग्रह किया। वहीं अंकुर सिंघल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एआई की मदद से शिक्षक कम समय में प्रभावी लेसन प्लान, प्रेजेंटेशन और वर्कशीट तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई कभी शिक्षक का स्थान नहीं ले सकता, लेकिन इसका प्रभावी उपयोग करने वाला शिक्षक भविष्य की शिक्षा का नेतृत्व अवश्य करेगा। कार्यक्रम के समापन पर प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया और प्रबंधक रीटा दहिया ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निरंतर प्रशिक्षण और सीखने की प्रवृत्ति ही शिक्षकों को उत्कृष्ट बनाती है तथा ऐसे शिक्षक ही सक्षम विद्यार्थियों और मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं।















