अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस में आठ इस्लामिक देशों ने शामिल होने पर सहमति जता दी है। इन देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि वे गाजा में स्थायी शांति, व्यापक पुनर्निर्माण और राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इस पहल का समर्थन करेंगे। यह बोर्ड गाजा सीजफायर के दूसरे चरण के तहत पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य संघर्ष के बाद क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए एक संगठित ढांचा तैयार करना है।बोर्ड ऑफ पीस का मुख्य मकसद गाजा में अस्थायी प्रशासन की व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण, फंडिंग और निवेश को एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ाना है। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस बोर्ड की अध्यक्षता स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे और इसमें शामिल प्रत्येक सदस्य देश को एक तय जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इन जिम्मेदारियों में शासन क्षमता को मजबूत करना, क्षेत्रीय संबंधों में सुधार, पुनर्निर्माण परियोजनाओं को गति देना, अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करना और पूंजी जुटाना शामिल है।संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह पहल गाजा के लोगों के लिए बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। संबंधित देशों ने उम्मीद जताई है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा प्रयासों से क्षेत्र में लंबे समय से जारी अस्थिरता को समाप्त किया जा सकेगा और शांति की प्रक्रिया को स्थायी आधार मिलेगा।
किन-किन देशों ने दी सहमति?
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रियों ने कतर की राजधानी दोहा में संयुक्त बयान जारी किया. बयान में कहा गया कि सभी देशों ने मिलकर बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का फैसला लिया है और वे अपने-अपने देशों की कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे. मिस्र, पाकिस्तान और UAE पहले ही बोर्ड में शामिल होने की घोषणा कर चुके थे.
इजराइल को आपत्ति क्यों?
हालांकि यह पहल विवादों में भी है. इजराइल ने साफ कहा है कि अमेरिका ने यह बोर्ड उससे बिना सलाह बनाए जाने का ऐलान किया, जो उसकी नीति के खिलाफ है. इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल को सबसे ज्यादा आपत्ति तुर्किये की भागीदारी से है. इजराइल का आरोप है कि तुर्किये हमास के प्रति नरम रुख रखता है और ऐसे देश को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.
फंडिंग को लेकर भी सवाल
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर के मुताबिक, स्थायी सदस्यता के लिए पहले साल में 1 अरब डॉलर देने होंगे. हालांकि व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को भ्रामक बताते हुए कहा कि बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम फीस नहीं है. स्थायी सदस्यता सिर्फ उन देशों को दी जाएगी जो शांति और स्थिरता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाएं. व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले हफ्तों में बोर्ड ऑफ पीस और गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के और सदस्यों के नामों का ऐलान किया जाएगा.















