मुजफ्फरनगर में सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत का 7वां महासम्मेलन शुरू, गठवाला विवाद पर टिकैत बोले— “नो कमेंट

मुजफ्फरनगर के ऐतिहासिक गांव सोरम में सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत का बहुप्रतीक्षित सातवां महासम्मेलन पारंपरिक शानों-शौकत और सांस्कृतिक गरिमा के साथ शुरू हुआ। आयोजन की शुरुआत शुक्रताल आश्रम के महंत ओमानंद महाराज द्वारा ध्वजारोहण और शुभकामना संदेश के साथ हुई। पंचायत स्थल पर सुबह से ही देशभर के विभिन्न प्रांतों से खाप चौधरी, सामाजिक प्रतिनिधि और खाप से जुड़े समर्थक पहुंचने लगे, जिससे पूरा क्षेत्र एक विशाल सामाजिक समागम में बदल गया।

महासम्मेलन के प्रारंभिक सत्र में सर्वखाप के दिवंगत मंत्री कबूल सिंह और भाकियू के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस अनावरण कार्यक्रम में चरथावल से समाजवादी पार्टी के विधायक पंकज मलिक और सर्वखाप से जुड़े वरिष्ठ चौधरियों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। दोनों महापुरुषों के योगदान को याद करते हुए उपस्थित जनसमूह ने उनके सिद्धांतों पर चलने का संकल्प दोहराया।

भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पंचायत को संबोधित करते हुए समाज के अंदर व्याप्त चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समाज की नैतिकता और अनुशासन बनाए रखना खापों का दायित्व है और समय-समय पर होने वाली सामाजिक कुरूतियों को रोकना आवश्यक है। टिकैत ने युवाओं को विशेष संदेश देते हुए नशे और पत्ते से दूर रहने, शिक्षा पर पूरा ध्यान देने और दहेज प्रथा का विरोध करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दहेज लेना बंद करो, देना अपने आप बंद हो जाएगा। गठवाला खाप की नाराजगी पर पूछे गए सवाल पर टिकैत ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने इस विषय पर “नो कमेंट” की नीति अपनाई है, जिससे उनके बयान पर सियासी और सामाजिक विमर्श फिर तेज हो गया।

पंचायत में पहुंचे समाजवादी पार्टी के चरथावल विधायक पंकज मलिक ने इस महासम्मेलन को भारत की समृद्ध संस्कृति का जीवंत उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि खाप पंचायतों की विशेषता रही है कि वे हमेशा समाज और सरकार के बीच संवाद का मजबूत माध्यम बनी हैं। मलिक ने इस तथ्य पर भी प्रकाश डाला कि जो लोग पहले सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय नहीं थे, वे भी अब ऐसे आयोजनों से प्रभावी तरीके से जुड़ने लगे हैं। उन्होंने खापों के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि खापें केवल सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि जनहित में सरकारों को सुझाव देने वाला मजबूत जनमत मंच भी रही हैं।

महासम्मेलन के पहले दिन की गतिविधियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह आयोजन केवल परंपराओं का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार, सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का सशक्त मंच भी है। विभिन्न राज्यों से पहुंचे खाप प्रतिनिधियों ने बताया कि इस बार महापंचायत में समाज सुधार, कृषि संकट, युवाओं के भविष्य और पंचायतों की आधुनिक भूमिका जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। आने वाले सत्रों में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे जाने की संभावना है।

सोरम गांव की ऐतिहासिक धरा एक बार फिर सामाजिक एकजुटता और सर्वखाप की विरासत का साक्षी बनी है। हजारों लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि खाप पंचायतें आज भी समाज में मजबूत प्रभाव और मार्गदर्शन की भूमिका निभाती हैं।

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