बांदा। पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक बांदा शिवराज के नेतृत्व में साइबर क्राइम पुलिस बांदा द्वारा रिटायर्ड अध्यापक को डिजिटल फ्राड के माध्यम से 36 लाख रुपये बचाए गए है। गौरतलब है कि कल एक्सिस बैंक शाखा प्रबंधक द्वारा साइबर थाना बांदा को सूचना दी गई कि एक रिटायर्ड शिक्षक के साथ साइबर ठगी की गंभीर घटना घटित हुई है । सूचना पर तत्काल कार्यवाही करते हुए जानकारी से ज्ञात हुआ कि साइबर ठगों ने स्वयं को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित शिक्षक को काल किया और बताया कि उनके नाम से संदीप कुमार नामक व्यक्ति के मामले में संदिग्धता पाई गई है । ठगों ने भय उत्पन्न करते हुए यह भी कहा कि शिक्षक ने कोरियर के माध्यम से ड्रग्स मंगवाए हैं तथा उनके नाम से खोले गए बैंक खाते के माध्यम से अवैध लेन-देन हुआ है । ठगों ने सीबीआई व दिल्ली पुलिस के नाम पर जांच का भय दिखाकर कहा कि उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है और अपने खातों की समस्त धनराशि को जांच हेतु रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए खाते में जमा करें । ठगों के बहकावे में आकर पीड़ित शिक्षक द्वारा लगभग 36 लाख रुपये का आरटीजीएस के तहत ट्रांजेक्शन कर दिया गया । बांदा पुलिस के सभी बैंकों से सघन समन्वय के कारण किसी भी संदिग्ध लेन-देन की सूचना तत्काल पुलिस को प्राप्त होती है। इसी क्रम में एक्सिस बैंक द्वारा समय पर जानकारी देते हुए साइबर क्राइम पुलिस को अवगत कराया गया । सूचना मिलते ही साइबर पुलिस टीम व बैंक अधिकारियों द्वारा तत्परता से प्रयास करते हुए उक्त 36 लाख रुपये की धनराशि को तुरंत रोका गया। जांच के दौरान पीड़ित शिक्षक को दिखाया गया कि वीडियो काल पर जो व्यक्ति स्वयं को पुलिस/सीबीआई अधिकारी बता रहे थे, वे पूरी तरह फर्जी थे । इस पर पीड़ित शिक्षक को बड़ी राहत मिली कि समय रहते उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित बच गई । प्रकरण में पीड़ित शिक्षक से एक तहरीर प्राप्त की गई है । उनके द्वारा दी गई सूचनाओं की घटना से पड़ताल की जा रही है तथा ठगों द्वारा प्रयुक्त मोबाइल नंबरों व बैंक खातों को ब्लॉक करने की कार्यवाही की जा रही है । इस संपूर्ण प्रकरण में आवश्यक विधिक कार्यवाही प्रचलित है । साइबर पुलिस की तत्परता व बैंक मैनेजर की जागरुकता से रिटायर्ड शिक्षक के डिजिटल फ्राड से 36 लाख रुपये बचाने पर पुलिस व बैंक मैनेजर का ह््रदय से धन्यवाद दिया गया ।
सभी नागरिकों से अपील है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था के कॉल पर अपनी व्यक्तिगत अथवा बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें । कोई भी व्यक्ति यदि स्वयं को पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” की बात करे, तो यह पूरी तरह फर्जी व भ्रामक है । वास्तविकता में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है । किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी की सूचना तत्काल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें ।















