मुजफ्फरनगर। रेलवे रोड स्थित सिविल लाइंस के तनेजा हॉस्पिटल में 21 और 22 मार्च को आयोजित 31वां टेम्पोरल बोन (कान की हड्डी) डिसेक्शन कोर्स सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। दो दिवसीय इस उन्नत चिकित्सा कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए 39 चिकित्सकों ने भाग लेकर आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम का उद्देश्य ईएनटी क्षेत्र के चिकित्सकों को कान की जटिल संरचना और उससे संबंधित आधुनिक सर्जरी तकनीकों से अवगत कराना था, जिससे मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिल सके। कार्यशाला की शुरुआत महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. तारिणी तनेजा द्वारा प्रतिभागियों का मेडल पहनाकर स्वागत करने के साथ हुई। इस दौरान प्रतिभागियों को कान की सूक्ष्म संरचना, सर्जिकल प्रक्रियाओं और नवीनतम उपकरणों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कोर्स का संचालन डॉ. विवेक तनेजा और डॉ. एम.के. तनेजा के निर्देशन में किया गया।
दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को स्टेप-बाय-स्टेप सर्जिकल तकनीकों का प्रशिक्षण देते हुए टेम्पोरल बोन डिसेक्शन की बारीकियों को व्यावहारिक रूप से समझाया। कार्यशाला में देश के कई प्रतिष्ठित ईएनटी विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए और युवा चिकित्सकों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में झारखंड, दिल्ली, बरेली, मुरादाबाद, मध्य प्रदेश और हरियाणा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए डॉक्टरों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. जसवीर सिंह और रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रोहित शर्मा ने महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए आधुनिक सर्जरी तकनीकों, रिसर्च और चिकित्सा शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में युवा चिकित्सकों द्वारा प्रस्तुत शोध कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले डॉ. परांजल और डॉ. पारस को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया। वहीं डॉ. तनेजा द्वारा मिनिमम एक्सेस मास्टॉयडेक्टॉमी तकनीक पर दिया गया विशेष व्याख्यान प्रतिभागियों के लिए बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा। कार्यक्रम के दौरान वीआईएमएस के प्रोफेसर डॉ. वी.पी. सिंह को चिकित्सा, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. एल.एन. नामदेव, डॉ. हिमांशु वर्श्नेय सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं आयोजन में सहयोग करने वाले राजेश शर्मा, अंकुर वाधवा, राहुल त्यागी, शुभम धीमान, हितेश त्यागी, मनोज पाल और विकास कश्यप को भी विशेष रूप से सराहा गया। यह कार्यशाला न केवल चिकित्सकों के कौशल विकास में सहायक सिद्ध हुई, बल्कि क्षेत्र में आधुनिक और उन्नत चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।















