मुजफ्फरनगर। जड़ौदा स्थित होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूक करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सही, सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग की जानकारी देने के उद्देश्य से कृत्रिम बुद्धिमत्ता जागरूकता एवं डिजिटल जिम्मेदारी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में एमआईईटी कॉलेज, मेरठ की कृत्रिम बुद्धिमत्ता विशेषज्ञ एवं प्रोफेसर शुभी वर्मा तथा शिखा चौहान ने विद्यार्थियों को एआई की उपयोगिता, कार्यप्रणाली और दैनिक जीवन में इसके बढ़ते प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शुभी वर्मा ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, अनुसंधान और व्यावसायिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एआई की मदद से आंकड़ों का विश्लेषण करने, चित्रों एवं आवाजों की पहचान करने, भाषा समझने, नई सामग्री तैयार करने और समस्याओं का समाधान खोजने जैसे कार्य किए जा सकते हैं। उन्होंने स्पैम ईमेल की पहचान का उदाहरण देकर समझाया कि एआई पुराने संदेशों के स्वरूप और विशेषताओं का विश्लेषण करके अनचाहे संदेशों की पहचान करने में सहायता करता है।
कार्यशाला में विद्यार्थियों को एआई आधारित उपकरणों का उपयोग पढ़ाई को प्रभावी बनाने, नई जानकारियां प्राप्त करने, रचनात्मकता बढ़ाने और समस्याओं के समाधान खोजने के लिए करने को प्रेरित किया गया। साथ ही बताया गया कि एआई से प्राप्त जानकारी को बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसकी सत्यता की पुष्टि करना जरूरी है। डिजिटल जिम्मेदारी के अंतर्गत विद्यार्थियों को इंटरनेट पर सुरक्षित रहने, व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रखने, साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करने और भ्रामक सूचनाओं की पहचान करने के बारे में जागरूक किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रवेंद्र दहिया ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ नई तकनीकों का ज्ञान देना भी आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग ज्ञान बढ़ाने, रचनात्मक क्षमताओं के विकास और समाज के लिए सकारात्मक योगदान देने में किया जाना चाहिए। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को जागरूक एवं जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाना रहा।















