सिरोही।राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ, जिला शाखा सिरोही द्वारा घोषित सामूहिक अवकाश 22 जुलाई को पांचवें दिन भी जारी रहा। इस कारण जिलेभर की अधीनस्थ न्यायालयों की कार्यप्रणाली पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। कर्मचारियों की हड़ताल से न्यायिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।
जिलाध्यक्ष जीवाराम ने बताया कि वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सरकार की उदासीनता के चलते कर्मचारी विरोध के रास्ते पर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार न्यायिक कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं करती, यह अवकाश जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि 17 जुलाई को जिला न्यायालय परिसर में आयोजित बैठक में सामूहिक अवकाश का निर्णय लिया गया था, जिसके तहत 18 जुलाई से सभी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर चले गए।
संघ के प्रवक्ता मनीष त्रिवेदी ने बताया कि कर्मचारियों को सचिवालय सेवाओं के समान वेतन, भत्ते, वेतन विसंगति दूर करना, समयबद्ध पदोन्नति और स्थायी नियुक्तियों जैसी मांगों को लेकर वर्षों से संघर्ष करना पड़ रहा है। वर्ष 2022 और 2023 में सरकार के साथ कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।
जबकि राजस्थान उच्च न्यायालय की फुल बेंच ने 6 मई 2023 को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि कर्मचारियों को राजस्थान सेवा नियम 1986 के अनुसार लाभ दिया जाए, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। संघ ने सभी कर्मचारियों से एकजुटता और अनुशासन के साथ आंदोलन में भाग लेने की अपील की है।
इस अवसर पर महासचिव भरत दवे, सचिव प्रशांत रावल, कोषाध्यक्ष ललित किशोर वैष्णव, प्रवक्ता मनीष त्रिवेदी, सहसचिव मोहम्मद ईदरिश, महामंत्री कमलेश रावल सहित विभिन्न तहसीलों के प्रभारी और प्रांतीय प्रतिनिधि धरने में शामिल रहे।















