शायरों ने पेश किए दिल को छू लेने वाले कलाम, देर रात तक समा बांध
सहारनपुर में शायरों को सम्मानित करते आयोजक। उर्दू अदब के सम्मान और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से आयोजित जश्न-ए-सिकंदर हयात मुशायरे में नामचीन और उभरते शायरों ने अपनी शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अंबेडकर मौलाना आजाद एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट तथा ऑल इंडिया उर्दू तालीमी बोर्ड, शाखा सहारनपुर के संयुक्त तत्वावधान में बेहट रोड स्थित एक सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन एम. आजाद अंसारी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अगर उर्दू अदब को जिंदा रखना है, तो उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार को प्राथमिकता देनी होगी। शायर समाज के दर्द और हालात को अपनी शायरी के जरिये बयान करता है। उन्होंने शायरों से दिलों को जोड़ने वाली शायरी करने का आह्वान भी किया। वरिष्ठ समाजसेवी मल्का अख्तर ने फीता काटकर मुशायरे का उद्घाटन किया, जबकि जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष माजिद अली ने शमा रोशन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुशायरे की शुरुआत नात-ए-पाक से शायर आसिफ शमसी ने की, और मंच संचालन की जिम्मेदारी खुर्रम सुल्तान ने निभाई। कार्यक्रम में जुल्फान अहमद, मुल चंद, अब्दुल वाजिद, दानिश कमाल, रय्यान सिद्दीकी और इब्राहिम आजाद बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। वरिष्ठ समाजसेवी इंतेखाब आजाद ने ट्रस्ट के कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुशायरे के संयोजक दानिश सिद्दीकी ने सहारनपुर की उर्दू अदबी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां सदैव बड़े मुशायरे व शेरी नशिस्तों का आयोजन होता रहा है, जिनसे उभरते शायरों को सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि उर्दू की खघ्दिमत में अनेक उस्ताद शायर लगातार प्रयासरत हैं। मुशायरे में दानिश कमाल, ताहिर अमीन, अदील ताबिश, असलम मोहसिन, मुस्तकीम रोशन, फराज अहमद, वली देवबंदी, शरर अकमली और गुल मुहम्मद जैसे शायरों ने अपने उत्कृष्ट कलाम से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कार्यक्रम के अंत में सभी शायरों को उर्दू भाषा व साहित्य में उनके योगदान के लिए संस्था द्वारा सम्मानित किया गया।















