11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है. धार्मिक एंगल के अलावा हेल्थ के लिहाज से देखा जाए तो व्रत रखना सेहत को फायदा पहुंचता है. लेकिन ये कंफ्यूजन रहती है कि क्या व्रत में खाए जाना वाला खाना भी ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है. डायबिटीज का शिकार बन चुके लोगों को व्रत रखते समय कई चीजों का खास ध्यान रखना चाहिए. दरअसल, फास्टिंग के लिए लोग मानते हैं कि इसमें खाई जाने वाली अमूमन हर चीज हेल्दी होती हैं.व्रत रखना भी सेहत के लिए अच्छा माना जाता है. इसलिए शुगर पेशेंट भी मान लेते हैं कि इसमें जो खाएंगे वो शरीर के लिए अच्छा ही होगा. डायबिटीज की गिरफ्त में आ चुके लोगों में कई पूरे नौ दिन के व्रत रखते हैं. एक्सपर्ट से जानें इसमें किन चीजों को खाने से बचना चाहिए.
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
डॉ. निशांत सिंह (सीनियर कंसल्टेंट एवं यूनिट हेड, इंटरनल मेडिसिन, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन) कहते हैं कि अक्सर डायबिटीज के मरीज मानते हैं कि व्रत में खाया जाने वाला खाना ब्लड शुगर नहीं बढ़ाता, लेकिन यह एक गलत धारणा है. डॉक्टर कहते हैं कि साबूदाना, आलू, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी चीजों में भी कार्बोहाइड्रेट होता है, जो अधिक मात्रा में खाने पर ब्लड शुगर बढ़ा सकता है.खासकर साबूदाने की खिचड़ी, आलू और तली हुई कुट्टू की पूरियों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. वहीं, लंबे समय तक खाली पेट रहने से कुछ मरीजों में शुगर कम भी हो सकती है, विशेषकर जो इंसुलिन या शुगर कम करने वाली कुछ दवाएं लेते हैं.
इन बातों का रखें खास ध्यान
इसलिए व्रत के दौरान सिर्फ क्या खा रहे हैं, यह नहीं, बल्कि कितना खा रहे हैं, इसका भी ध्यान रखें. संतुलित मात्रा में फल, दही, पनीर और फाइबर युक्त आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं और नियमित रूप से ब्लड शुगर जांचते रहें. व्रत के अनुसार दवाओं की खुराक या समय में बदलाव डॉक्टर की सलाह से ही करें.
शुगर के मरीज का भूखा रहना सही या गलत?
एक्सपर्ट कहते हैं कि डायबिटीज है और व्रत में लंबे समय तक भूखा रहना, हर किसी के लिए सेफ नहीं होता. खासतौर पर जो लोग इंसुलिन या दवाएं ले रहे हैं जिनसे ब्लड शुगर को कम किया जाता है. इस गलती की वजह से हाइपोग्लाइसीमिया जिसमें ब्लड शुगर का काफी कम होने का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा लंबे समय तक बिना खाए रहने से डिहाइड्रेशन भी हो सकता है.डायबिटीज में व्रत के दौरान अगर शुगर कम हो रही है तो कमजोरी, पसीना, चक्कर, घबराहट और कंफ्यूजन होने जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं.दवाओं के असर की बात करें तो खाना कम होने पर कुछ डायबिटीज की दवाओं और इंसुलिन की वजह से शुगर जरूरत से ज्यादा गिर सकती है. जो टाइप-1 डायबिटीज, इंसुलिन लेने वाले, बार-बार लो शुगर, किडनी-हार्ट की बीमारी का शिकार हैं उन्हें बिना मेडिकल सलाह के लंबे समय तक फास्ट नहीं रखना चाहिए.















