यूपी में सरकारी नौकरी के आवेदकों को किन बातों का ध्यान रखना होगा?

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ये खबर बेहद अहम है. योगी सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों के कैरेक्टर वेरिफिकेशन को लेकर नई नीति जारी की है. इस नीति में साफ किया गया है कि किन आपराधिक मामलों में आरोप तय होने पर अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य हो सकता है, किन मामलों में दोषसिद्धि जरूरी होगी और किन परिस्थितियों में राहत मिलेगी.इतना ही नहीं, अगर किसी अभ्यर्थी ने आवेदन या स्वघोषणा पत्र में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे, गिरफ्तारी या आपराधिक इतिहास की जानकारी छिपाई, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है. उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है, लेकिन यहां एक अहम बात समझना जरूरी है. हर FIR या हर लंबित मुकदमे के आधार पर नौकरी से अयोग्यता नहीं होगी. सरकार ने अपराधों की अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं और उनके लिए अलग नियम तय किए हैं.

अदालत से अंतिम रूप से दोषमुक्त होने, लोक अदालत में आपसी समझौते से मामला निस्तारित होने, कानून के तहत शमन होने, अभियोजन वापस लिए जाने, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा कार्यवाही रद्द किए जाने या सक्षम अदालत द्वारा अंतिम रिपोर्ट स्वीकार किए जाने जैसी स्थितियों में भी निर्धारित अपवाद लागू होंगे. कुछ छोटे अपराधों में भी राहत का प्रावधान हैय इनमें ऐसे असंज्ञेय या शमनीय अपराध शामिल हैं, जिनमें केवल जुर्माना या सामुदायिक सेवा का प्रावधान होय

अधिकतम एक वर्ष तक की सजा वाले निर्दिष्ट अपराध, 10 हजार रुपये से कम मूल्य की संपत्ति से जुड़े कुछ अपराध और यातायात संबंधी उल्लंघन भी राहत के दायरे में आ सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित गंभीर अपराध श्रेणियों में न आते हों. एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है. कैटेगरी-D के किसी अपराध में दोषसिद्धि के बाद सात वर्ष बीत चुके हों और अभ्यर्थी का बाद का आचरण अच्छा रहा हो, तो नियुक्ति प्राधिकारी लिखित कारण दर्ज करते हुए छूट देने पर विचार कर सकता है.

किन मामलों में राहत संभव?

  • केवल FIR या विवेचना लंबित होने से स्वतः अयोग्यता नहीं
  • आरोपपत्र दाखिल, लेकिन अदालत ने आरोप तय नहीं किए: निर्धारित अपवाद लागू
  • अदालत से अंतिम दोषमुक्ति या कार्यवाही रद्द होने पर राहत संभव
  • कुछ छोटे और शमनीय अपराधों में छूट
  • कैटेगरी-D में दोषसिद्धि के 7 वर्ष बाद अच्छे आचरण पर विचार संभव

आपराधिक इतिहास छिपाया तो नियुक्ति रद्द

अब बात उस नियम की, जिसका असर हर चयनित अभ्यर्थी पर पड़ सकता है. नई नीति के तहत आवेदन पत्र, सत्यापन पत्र और स्वघोषणा पत्र में आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य है. अभ्यर्थी को बताना होगा कि उसे कभी किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया है या नहीं, उसके खिलाफ अभियोजन चला है या नहीं और किसी अदालत ने उसे दोषी ठहराया है या नहीं.

इसके अलावा दर्ज FIR, आरोपपत्र, लंबित विचारण, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, पूर्व सेवा से बर्खास्तगी और किसी आयोग या बोर्ड की ओर से अनुचित साधनों के इस्तेमाल के कारण परीक्षा या चयन से प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी भी देनी होगी. अगर अभ्यर्थी जानकारी छिपाता है या गलत तथ्य देता है और बाद में इसका पता चलता है, तो उसकी नियुक्ति निरस्त की जा सकती है. उसे सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित करने के साथ भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अनुसार अन्य दंडात्मक, दीवानी या कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.

पुलिस और प्रशासन को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

नई नीति में चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया और समयसीमा भी तय की गई है. नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी का पूरा विवरण पुलिस महानिदेशक यानी DGP, अभिसूचना और संबंधित जिलाधिकारी को भेजेगा. अभ्यर्थी के गृह जिले के साथ उन जिलों में भी सत्यापन कराया जाएगा, जहां वह जांच की तारीख से पिछले पांच सालों के दौरान एक वर्ष से अधिक समय तक रहा हो. जिलाधिकारी, जिला पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट प्राप्त करेंगे. जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई अपने उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करके बताएगी कि अभ्यर्थी के खिलाफ कोई प्रतिकूल तथ्य है या नहीं.

सामान्य मामलों में अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ करना, उसकी भौतिक उपस्थिति अनिवार्य करना या अतिरिक्त दस्तावेज मांगना जरूरी नहीं होगा. हालांकि, किसी विशेष मामले में नियुक्ति प्राधिकारी के अनुरोध पर मौके पर जांच कराई जा सकेगी. अगर अभ्यर्थी पिछले पांच सालों में किसी दूसरे राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में एक साल या उससे अधिक समय तक रहा है, तो संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के पुलिस प्रमुख से भी परामर्श किया जाएगा.

शासनादेश के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक अभिसूचना और जिलाधिकारियों को संदर्भ प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी. अगर तय समय में रिपोर्ट नहीं मिलती, तो नियुक्ति प्राधिकारी मामला गृह विभाग को भेजेगा. गृह विभाग रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा. अगर पुलिस रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी रिपोर्ट भेजने से पहले अभ्यर्थी को सुनवाई का अवसर देंगे. सुनवाई भौतिक या ऑनलाइन, दोनों तरीकों से हो सकती है.

सत्यापन के इंतजार में नियुक्ति नहीं रुकेगी

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य मामलों में चरित्र सत्यापन के कारण नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया लंबित नहीं रखी जाएगी. चयनित अभ्यर्थी से निर्धारित प्रारूप में सत्यापन पत्र और स्वघोषणा पत्र लेकर औपबंधिक यानी प्रोविजनल नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा, लेकिन संवेदनशील पदों या सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे पदों पर, जहां विस्तृत पूर्व सत्यापन जरूरी है, नियुक्ति से पहले सत्यापन पूरा करना अनिवार्य होगा. ऐसे पदों पर औपबंधिक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया जाएगा.

राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा

शासनादेश में राजनीतिक विचारधारा को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है. किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के कारण सरकारी नौकरी के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा. हालांकि, ऐसे संगठन का सदस्य होना, जिसका घोषित उद्देश्य हिंसक तरीके से समाज की मौजूदा व्यवस्था को बदलना है, सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्यता का आधार होगा.

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts