विदेशों में पढ़ाई के लिए जाना हर किसी का सपना होता है और कई भारतीय छात्र अलग-अलग देशों से पढ़ाई कर भी रहे हैं. इन देशों में आस्ट्रेलिया का भी नाम शामिल है, जहां भारतीय छात्रों की संख्या ज्यादा है. लेकिन, अब आस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे या करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार इंटर छात्रों के लिए वीजा नियमों को और सख्त करने जा रही है. नए नियमों के तहत विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई के दौरान अपने पति-पत्नी और बच्चों को साथ ऑस्ट्रेलिया लाना बंद करने की योजना है.आस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने वाले स्टूडेट्स के लिए ये बदलाव ऐसे समय में आया है, जब ऑस्ट्रेलिया सरकार देश में बढ़ते प्रवासन को कम करने की कोशिश कर रही है. दरअसल, ये इसलिए हुआ है क्योंकि अभी तक कई इंटरनेशनल स्टूडेंट्स पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया जाते समय अपने पार्टनर और बच्चों को भी साथ ले जाने के लिए संबंधित वीजा विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं. अब जिस बदलाव की बात हो रही है, उसके बाद ये रास्ता बहुत लिमिटेड हो जाएगा.
ऑस्ट्रेलिया में प्रवासन तेजी से बढ़ा है
हालांकि, आस्ट्रेलियाई सरकार ने बताया है कि प्रशांत द्वीप समूह और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों के छात्रों को इस नियम से थोड़ी छूट मिल सकती है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में आने वाले लोगों की संख्या को कम करना है. रायटर्स के मुताबिक, सरकार नेट माइग्रेशन को मौजूदा करीब 3 लाख के स्तर से घटाकर 2028 तक लगभग 2.25 लाख प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रख रही है. पिछले कुछ सालों में ऑस्ट्रेलिया में प्रवासन तेजी से बढ़ा था.
किन देशों के छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा?
साल 2023 में नेट माइग्रेशन करीब 5.18 लाख तक पहुंच गया था, जो जून 2025 तक घटकर करीब 3.06 लाख रह गया. इस आंकड़े में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की भी बड़ी भूमिका रही है. आस्ट्रेलिया में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के मामले में टॉप 5 देशों को देखें, तो इसमें चीन, भारत, नेपाल, वियतनाम और बांग्लादेश सबसे आगे है. आस्ट्रेलिया में इंटरनेशमल स्टूडेंट्स पर बेस्ड रिपोर्ट के मुताबिक, इन पांच देशों से मिलकर कुल इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की आधी हिस्सेदारी आती है.
| देश | छात्रों की हिस्सेदारी | |
| 1. | चीन | 1,59,860 |
| 2. | भारत | 1,10,662 |
| 3. | नेपाल | 60,732 |
| 4. | वियतनाम | 31,064 |
| 5. | बांग्लादेश | 27,831 |
सबसे ज्यादा हिस्सेदारी चीन की है
रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 तक ऑस्ट्रेलिया में कुल 6,80,582 इंटरनेशनल स्टूडेंट्स का आंकड़ा मिला. इनमें सबसे ज्यादा चीन के स्टूडेंट्स पढ़ाई के लिए जाते हैं, जिनकी हिस्सेदारी लगभग 23 फीसदी है. चीन के बाद भारत 16 फीसदी, नेपाल 9 फीसदी, वियतनाम 5 फीसदी और बांग्लादेश की 4 फीसदी हिस्सेदारी आती है. इस आंकड़े में खासतौर पर चीन और भारत का बड़ा योगदान शामिल है. ऑस्ट्रेलिया सरकार की ओर से ये बदलाव सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं हैं. सरकार ने वर्किंग हॉलीडे वीजा के लिए बैलेट सिस्टम और कुछ विजिटर वीजा धारकों के लिए देश के अंदर दूसरे वीजा में बदलने पर पाबंदियों जैसे कदमों की भी घोषणा की है.
स्टूडेंट वीजा फीस में बढ़ोतरी
परिवार को साथ ले जाने पर रोक के अलावा ऑस्ट्रेलिया इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए और भी कई नियम सख्त कर रहा है. इनमें अंग्रेजी भाषा और आर्थिक क्षमता से जुड़ी आवश्यकताओं को बढ़ाना तथा स्टूडेंट वीजा फीस में बड़ी बढ़ोतरी शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार सालों में छात्र वीजा फीस में करीब 300% की बढ़ोतरी हुई है. विदेशी छात्र ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत बड़ी कमाई का जरिया हैं, लेकिन उनकी बढ़ती संख्या को सरकार प्रवासन नियंत्रित करने के नजरिए से भी देख रही है. यही वजह है कि सरकार छात्र वीजा और परिवार को साथ लाने जैसे नियमों को सख्त करने पर जोर दे रही है.














