बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपनी पार्टी की कमान बेटी पुतुल को सौंप सकती हैं. दरअसल, शेख हसीना ने ढाका लौटने से पहले पुतुल को पार्टी की सर्वोच्च इकाई पार्लियामेंट्री बोर्ड में शामिल करने का फैसला किया है. 80 साल की हसीना ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब बांग्लादेश में उनके उत्तराधिकार का मुद्दा गर्म है. इससे पहले यह चर्चा थी कि हसीना पार्टी में अपने बेटे साजिब वाजिद जॉय को बांग्लादेश की राजनीति में सक्रिय कर सकती हैं.टाइम्स ऑफ बांग्लादेश के मुताबिक पुतुल को शीर्ष इकाई में शामिल करने के लिए शेख हसीना ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक नई दिल्ली में बुलाई है. शुक्रवार को यह बैठक उस जगह पर हो सकती है, जहां शेख हसीना बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से रह रही हैं.
बेटी को आगे क्यों ला रही शेख हसीना?
1. शेख हसीना की बेटी पुतुल पर बांग्लादेश में कोई गंभीर अपराध में मुकदमा दर्ज नहीं है. पुतुल पर सिर्फ करप्शन के केस हैं. एक मामले में उन्हें 5 साल जेल की सजा सुनाई गई है. वहीं शेख हसीना के बेटे साजिब के खिलाफ मानवता के अपराध और भ्रष्टाचार का केस दर्ज है. इस आरोप में उन्हें मौत की सजा सुनाई जा सकती है. यानी बेटे पर बांग्लादेश में ज्यादा खतरा है.
2. पुरुषों के मुकाबले बांग्लादेश की राजनीति में महिलाओं का दबदबा रहा है. 1990 से 2024 के बीच बांग्लादेश की सियासत में सिर्फ दो महिला नेत्री (शेख हसीना और खालिदा जिया) का दबदबा रहा. बांग्लादेश में महिला नेताओं की स्वीकार्यता ज्यादा है.
राजनीति में आने के लिए WHO से इस्तीफा
शेख हसीना जब राजनीति में थी, तब पुतुल जॉय विश्व स्वास्थ्य संगठन में काम कर रही थीं. इस दौरान उन पर कई आरोप भी लगे. हालांकि, पुतुल का काम जारी रहा. इसी साल पुतुल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से इस्तीफा दे दिया है. पुतुल विश्व स्वास्थ्य संगठन में साउथ-ईस्ट इकाई की प्रमुख थीं.
साल के आखिर में बांग्लादेश वापस जाएंगी हसीना
5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट हो गया. इसके बाद उन्हें भागकर नई दिल्ली आना पड़ा तब से शेख हसीना और उनके पार्टी के कई बड़े नेता भारत में ही रह रहे हैं. हसीना ने इस साल के आखिर में ढाका वापस जाने की घोषणा की थी.हसीना के वापसी की घोषणा करते हुए कहा- बांग्लादेश में कट्टरपंथी सक्रिय हो गए हैं. वहां पर महिलाओं पर जमकर अत्याचार हो रहा है. अल्पसंख्यक सरकार से दुखी है. इन लोगों को न्याय दिलाने के लिए मैं ढाका वापस जाऊंगी.














