पाकिस्‍तान का ‘आर्टिकल 370’ वाला दांव, PoK का स्टेटस बदलने की तैयारी,

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझाने को लेकर हुई बातचीत के बाद इस्लामाबाद में पीओके को लेकर बड़ी हलचल देखी जा रही है। ऐसी रिपोर्ट है कि शहबाज शरीफ की सरकार पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान को मिले संवैधानिक दर्जे में बदलाव करने पर विचार कर रही है।इसके तहत एक नये संवैधानिक ढांचे पर विचार किया जा रहा है जिसके तहत इन दोनों ही क्षेत्रों को पाकिस्तान का अंतरिम प्रांत घोषित किया जा सकता है।

पाकिस्तान का ये विचार कुछ कुछ वैसा ही है जैसा भारत ने 2019 में आर्टिकल 370 खत्म किया था। अगस्त 2019 में भारत ने आर्टिकल 370 खत्म करके लद्दाख और जम्मू-कश्मीर को पूरी तरह से भारत में समाहित कर लिया था। पाकिस्तान अब उसी मॉडल पर चलते हुए PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान को आधिकारिक रूप से अपने संविधान में प्रांत का दर्जा देने की फिराक में है।

न्यूज 18 ने इस्लामाबाद में शहबाज सरकार के अधिकारियों के हवाले से इसकी जानकारी दी है। उन अधिकारियों ने बताया है कि ये प्रस्तावित बदलाव बहुचर्चित 28वें संवैधानिक संशोधन या किसी अन्य आगामी कानून के जरिए किए जा सकते हैं। साथ ही पाकिस्तान अपने संविधान के अनुच्छेद 1, खंड 2 में बदलाव की संभावना पर भी विचार कर रहा है जिसमें देश के अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों को परिभाषित किया गया है।

पीओके, गिलगित को प्रांत बनाने की तैयारी में पाकिस्तान

सूत्रों के मुताबिक इस्लामाबाद भारत-चीन के बीच चल रही सीमा वार्ता और नई दिल्ली और बीजिंग के बीच हो रहे महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है। खासकर पिछले हफ्ते भारतीय एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच एतिहासिक बैठक को लेकर वो सतर्क है। इसके तहत दोनों ही देशों ने तय किया है कि वो सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बंदूक की जगह बातचीत करेंगे। ये बैठक काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि चीन अभी तक सीमा विवाद को लेकर सीधा बातचीत करने से इनकार कर रहा था। चीन ऐसे पेंच फंसाता रहता था ताकि सीमा विवाद को लेकर बातचीत टलता रहेइसीलिए बीजिंग में अजीत डोभाल और वांग यी के बीच हुई बैठक का असर जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के रुख और उसके नियंत्रण वाले इलाकों के संवैधानिक दर्जे पर पड़ सकता है। यह संभावित कदम गिलगित-बाल्टिस्तान और जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के संवैधानिक नजरिए में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया है कि इस्लामाबाद इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या इन दोनों क्षेत्रों को प्रांतों जैसा अंतरिम संवैधानिक दर्जा दिया जा सकता है जबकि कश्मीर विवाद पर पाकिस्तान का जो आधिकारिक रुख है उसे भी बनाए रखा जाए। पाकिस्तान पीओके को ‘आजाद कश्मीर’ कहता है।

चीन-भारत की बातचीत पर पाकिस्तान की करीबी नजर

पाकिस्तान भारत और चीन के बीच हुई बातचीत पर बारीकी से नजर रख रहा है क्योंकि भारत और चीन के बीच विवादित सीमा को लेकर कोई भी समझौता कश्मीर क्षेत्र और भारत, पाकिस्तान और चीन से जुड़ी मौजूदा क्षेत्रीय व्यवस्थाओं पर बड़े असर डाल सकता है। इस बीच बीजिंग नई दिल्ली के साथ काम के लायक रिश्ते बनाने की कोशिश कर रहा है साथ ही इस्लामाबाद के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी भी बनाए हुए है। चीन पाकिस्तान का एक अहम रणनीतिक और आर्थिक साझेदार बना हुआ है इसलिए भारत-चीन संबंधों की दिशा इस्लामाबाद की रणनीतियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।सूत्रों का कहना है कि भविष्य में भारत-चीन सीमा समझौता होने की संभावना उन वजहों में से एक है जिनकी वजह से पाकिस्तान PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के संवैधानिक और राजनीतिक दर्जे पर विचार कर रहा है। भारत-चीन सीमा का मुद्दा सीधे तौर पर जम्मू-कश्मीर में बड़े क्षेत्रीय विवाद से जुड़ा है। अक्साई चिन पर चीन का नियंत्रण है जबकि PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान का प्रशासन पाकिस्तान के पास है। पाकिस्तान ने 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत शक्सगाम घाटी भी चीन को सौंप दी थी जिसे भारत ने खारिज कर दिया था।

 

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