चुनाव आयोग ने 6 राज्यों में SIR की समय सीमा बढ़ाई,

चुनाव आयोग ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नागालैंड में वोटर लिस्ट के ‘विशेष सघन पुनरीक्षण’ (SIR) के कार्यक्रम में बदलाव किया है.यह प्रशासनिक निर्णय संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) द्वारा किए गए विशेष अनुरोध के बाद लिया गया है. चुनाव आयोग ने इस संबंध में इन सभी पांचों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को आधिकारिक पत्र भेजकर समय-सीमा बढ़ाए जाने की सूचना दे दी है.

इस नए फैसले के तहत महाराष्ट्र में अब दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि को 26 अक्टूबर से बढ़ाकर 13 नवंबर कर दिया गया है. इसके बाद मिले दावों के नोटिस और उनके निपटारे की पूरी प्रक्रिया 25 नवंबर तक संचालित की जाएगी, जबकि फाइनल वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन 30 नवंबर को किया जाएगा. बता दें कि महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट 31 अगस्त को जारी हुआ था और पूर्व में इसके निपटारे की तारीख 10 नवंबर निर्धारित थी.

दिल्ली में भी मतदाताओं को बड़ी राहत

इसी प्रकार देश की राजधानी दिल्ली में भी मतदाताओं को बड़ी राहत दी गई है, जहां अब 30 अक्टूबर के बजाय 25 नवंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी. इसके साथ ही दिल्ली में दावों के निपटारे की समय-सीमा को भी 30 नवंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दिया गया है और यहां फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन 22 दिसंबर को किया जाएगा. प्रशासनिक कारणों और स्थानीय त्योहारों या अन्य व्यस्तताओं के चलते SIR प्रक्रिया के इस कार्यक्रम को पहले भी कई मौकों पर आगे बढ़ाया जाता रहा है.

इन राज्यों में भी अंतिम सूची की तारीख बढ़ी

हरियाणा और आंध्र प्रदेश में दावों और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तिथि 20 नवंबर तय की गई है. तेलंगाना में इस प्रक्रिया को 26 नवंबर तक और नागालैंड में 25 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. इन सभी राज्यों-हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नागालैंड, में फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन 30 नवंबर को किया जाएगा.

क्यों बढ़ाई गई फाइनल वोटर लिस्ट की समय सीमा

SIR का मकसद वोटर लिस्ट को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना है. इसके तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन का कार्य, नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, पते में बदलाव और दोहरी प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया शामिल होती है. स्थानीय प्रशासनिक व्यस्तताओं, त्योहारों के मौसम और भारी संख्या में प्राप्त हो रहे आवेदनों के चलते इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए निर्वाचन अधिकारियों ने समय बढ़ाने की मांग की थी, जिसके बाद आयोग ने यह विस्तार मंजूर किया.

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