गोवा में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया के दौरान 97 वोटर मिसिंग मामले को लेकर गुरुवार को चुनाव आयोग ने ताजा जानकारी दी है. आयोग का कहना है कि 88 मामलों को अब सुलझा लिया गया है. इन वोटरों ने ‘फॉर्म 6’ जमा किया है और उनके नाम या तो वोटर लिस्ट में दोबारा जोड़ दिए गए हैं या फिर उन्हें लिस्ट में शामिल करने की मंजूरी दे दी गई है.दरअसल, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान छूटे इन वोटरों को लेकर विवाद खड़ा हुआ तो गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट की थी. उसका कहना था कि आयोग की टीम ने बाद में घर-घर जाकर इन मामलों की जांच की और उनमें से कई मतदाताओं का नाम अब सूची में शामिल कर लिया गया है.
अब फिर से गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि 97 में से 88 मामलों को वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के जरिए सुलझा लिया गया है. इन वोटरों ने ‘फॉर्म 6’ भरा है. इस फॉर्म का इस्तेमाल योग्य वोटरों के रजिस्ट्रेशन या वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए किया जाता है. वहीं बचे हुए नौ मामले दो अलग-अलग कैटेगरी में आते हैं. आयोग ने बताया कि तीन लोगों ने पुर्तगाल की नागरिकता ले ली है और 6 लोग देश से बाहर हैं. इन छह मामलों पर अभी काम चल रहा है और अधिकारी आगे कोई कदम उठाने से पहले संबंधित लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
97 वोटरों के साथ क्या हुआ था?
एक अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने चुनावी डेटाबेस में “लॉजिकल गड़बड़ियों” (logical discrepancies) का हवाला देते हुए SIR प्रक्रिया के दौरान शुरू में इन 97 वोटरों को चिह्नित किया था. ये गड़बड़ियां पुरानी वोटर लिस्ट में वोटर को उनके माता-पिता या दादा-दादी से जोड़ने के दौरान जानकारी मेल न खाने जैसी वजहों से हो सकती थीं. इसके बाद, प्रभावित वोटरों को दस्तावेज और आपत्तियां जमा करने का मौका दिया गया.गोवा में 649 वोटर सामने आए, जिसके बाद इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) और असिस्टेंट EROs ने उनके मामलों की जांच की. अधिकारियों को 97 ऐसे मामले मिले जिनमें पहले लिए गए फैसलों को बदलना जरूरी था और वे वोटर लिस्ट में शामिल होने के योग्य थे.















