बांदा। गिरोहबंद अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत बांदा की विशेष गैंगस्टर अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने गैंगस्टर एक्ट में कुर्क की गई 41 लाख 66 हजार रुपये की संपत्ति को मुक्त करने की अर्जी खारिज कर दी है।मामला थाना कालिंजर में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमा से जुड़ा है। इस मामले में जिला मजिस्ट्रेट बांदा ने गिरोहबंद अधिनियम की धारा 14(1) के तहत आरोपी की दो संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया था। कुर्क की गई संपत्तियों में एक निशान कार जिसकी कीमत 2 लाख 24 हजार 678 रुपये और एक पोकलैंड मशीन जिसकी कीमत 39 लाख 41 हजार 250 रुपये है। दोनों की कुल कीमत 41 लाख 65 हजार 928 रुपये यानी लगभग 41.66 लाख रुपये है। संपत्ति को छुड़ाने के लिए साहब नगर, कल्याणपुर, कानपुर निवासी विकास कुमार गुप्ता पुत्र लालाराम गुप्ता ने न्यायालय में आवेदन दिया था। आरोपी की तरफ से कहा गया कि उसके पास खेती, ठेकेदारी और व्यवसाय से आय होती है। कार फाइनेंस पर ली गई है और पोकलैंड मशीन किराए पर चलती है।
इसके लिए आयकर रिटर्न, खेत के कागज और किस्तों के कागज भी पेश किए गए। वहीं राज्य सरकार की तरफ से विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) सौरभ सिंह ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने तर्क दिया कि केवल खेती और किराए की आय का दावा करना काफी नहीं है। संपत्ति खरीदने के लिए वैध और पुख्ता कागजों से आय का स्रोत साबित करना जरूरी है, जो आरोपी नहीं कर पाया।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायालय ने पाया कि आरोपी द्वारा पेश किए गए आयकर रिटर्न, किस्तों के विवरण और किराए की आय के कागजों से यह साबित नहीं होता कि कार और पोकलैंड मशीन वैध आय से खरीदी गई हैं। अदालत ने माना कि आरोपी अपनी कुर्क संपत्ति को छुड़ाने के लिए संतोषजनक आधार पेश नहीं कर सका। इसी आधार पर न्यायालय ने कार और पोकलैंड मशीन को मुक्त करने की अर्जी निरस्त कर दी और आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया।















