खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को किया जागरूक, फसल अवशेष न जलाने की अपील.

मुजफ्फरनगर। भारत सरकार द्वारा संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, चितौड़ा, मुजफ्फरनगर-द्वितीय की ओर से 22 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन तथा रबी फसलों की उन्नत खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है। केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. यश पाल सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. रीना, डॉ. पूजा, डॉ. संजीव कुमार और डॉ. उत्तम राठी ने किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों की जानकारी दी। जानसठ और खतौली विकासखंड के विभिन्न गांवों से 70 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इनमें नगला कबीर, नगला मुबारिक, पलड़ा, तलड़ा, जंधेड़ी, सोंटा, सिखेड़ा, चितौड़ा और बेहड़ा आस्सा गांवों के किसान शामिल रहे।

वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पराली और अन्य फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवों को नुकसान पहुंचता है तथा पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। किसानों को सुपर सीडर सहित आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों का खेत में ही उचित प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही आगामी रबी सीजन में गेहूं, सरसों और अन्य फसलों की वैज्ञानिक खेती के बारे में जानकारी दी गई। किसानों को उन्नत किस्मों का चयन, समय पर बुवाई, बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रयोग, खरपतवार नियंत्रण, कीट-रोग प्रबंधन और उचित सिंचाई व्यवस्था अपनाने की सलाह दी गई। वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करते हुए गेहूं की समय पर बुवाई करने पर जोर दिया। अभियान का उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुरक्षित रखने, फसल अवशेष जलाने की प्रथा रोकने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि को प्रोत्साहित करना है।

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