इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार है. हालांकि, वह सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी योजना से इनकार कर चुके हैं. इजराइली मीडिया i24 न्यूज के मुताबिक, नेतन्याहू की पार्टी लिकुड के करीबी नेताओं ने बताया कि प्रधानमंत्री सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू को डर है कि आइजनकोट अरब पार्टियों और अति-धार्मिक यहूदी गुटों के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं.27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव व में नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत नहीं मिला. इजराइल की 120 सदस्यों वाली नेसेट (संसद) में नेतन्याहू के सहयोगी दलों को 53 सीटें मिली हैं. पिछली संसद में उनके पास 68 सीटें थीं. वहीं, आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिली हैं. विपक्ष और अरब पार्टियों की कुल सीटें बहुमत के लिए काफी हैं. हालांकि, उनके बीच सरकार बनाने को लेकर सहमति नहीं बनी है.
अरब पार्टियों पर क्या बोले नेतन्याहू?
नेतन्याहू ने कहा है कि आइजनकोट का अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाना देशद्रोह जैसा होगा. विपक्षी नेताओं ने इसकी आलोचना की है. उनका आरोप है कि नेतन्याहू दूसरी सरकार बनने से रोकना चाहते हैं. रविवार को कुछ दर्जन लोग आइजनकोट के घर के बाहर जुटे और अरब पार्टियों के साथ गठबंधन की संभावना का विरोध किया. वहीं, हाल के दिनों में कुछ दूसरे प्रदर्शनों में यहूदी और अरब दलों को साथ आकर सरकार बनाने की मांग भी उठी.
चुनाव नतीजों पर उठे थे सवाल
सरकार बनाने की बातचीत के बीच नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे. हालांकि, पार्टी ने ऐसा कोई सबूत नहीं दिया है जिससे साबित हो कि चुनाव नतीजे प्रभावित हुए. लिकुड ने वोट खरीदने की कोशिश के मामलों का जिक्र किया है. 27 अक्टूबर को मतदान शुरू होने से पहले कैश भरे लिफाफों के साथ तीन राजनीतिक कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए थे. दो दिन बाद इस्लामी पार्टी राअम से कथित संबंधों के आरोप में चार और लोगों को गिरफ्तार किया गया.हालांकि पहले गिरफ्तार किए गए तीन लोगों में से 2 को रिहा किया जा चुका है. चुनाव में विदेशी दखल के शक की जांच भी इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट कर रही है. चुनाव आयोग के प्रमुख नोआम सोलबर्ग ने कहा कि अगर चुनाव में विदेशी दखल के आरोप सही भी साबित होते हैं, तब भी चुनाव के नतीजे नहीं बदलेंगे. इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल नहीं उठेगा.
आइजनकोट ने नेतन्याहू पर लगाए आरोप
आइजनकोट ने नेतन्याहू पर चुनाव नतीजों को गलत साबित करने की मुहिम चलाने का आरोप लगाया है. नेतन्याहू ने दावा किया था कि कतर ने विपक्षी दलों की मदद की. कतर ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए पैसा देने से इनकार किया है.चुनाव नतीजों को 4 नवंबर को आधिकारिक मंजूरी मिलने की उम्मीद है. इसी दिन राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग चुने गए दलों के नेताओं से बातचीत करेंगे. इसके बाद वह किसी एक नेता को 11 नवंबर तक सरकार बनाने का मौका देंगे. उस नेता को बहुमत के लिए दूसरे दलों का समर्थन जुटाना होगा. इसके लिए 28 दिन का समय मिलेगा, अगर वह नाकाम रहता है, तो राष्ट्रपति किसी दूसरे नेता को मौका दे सकते हैं. कोई गठबंधन नहीं बन पाने पर इजराइल में फिर चुनाव हो सकते हैं.















