योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए नई स्थानांतरण नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत राज्य सेवा के समूह ‘क’ और ‘ख’ के उन अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला अनिवार्य रूप से किया जाएगा, जो एक ही जिले में तीन वर्ष या किसी एक मंडल में सात वर्ष से अधिक समय से तैनात हैं। स्थानांतरण के लिए 31 मार्च 2026 को कट-ऑफ तिथि निर्धारित की गई है और अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही तबादले किए जा सकेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी स्थानांतरण हर हाल में 31 मई 2026 तक पूरे कर लिए जाएंगे।
कैबिनेट बैठक मुख्यमंत्री आवास पांच कालिदास मार्ग पर आयोजित हुई, जिसमें कुल 29 प्रस्ताव पेश किए गए और सभी को मंजूरी मिल गई। बैठक के बाद जानकारी देते हुए सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि स्थानांतरण नीति में पिछले वर्ष की तरह ही प्रावधान रखे गए हैं और इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के लिए तबादलों की सीमा 10 प्रतिशत तय की गई है, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक किया जा सकता है। यदि समूह ‘ग’ के कर्मचारियों का जिला परिवर्तन संभव नहीं होगा तो उनका पटल परिवर्तन अनिवार्य रूप से किया जाएगा।नई नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनाती नहीं दी जाएगी। वहीं जिन अधिकारियों के पद केवल मंडल स्तर पर हैं, उन्हें उनके गृह मंडल में भी तैनात नहीं किया जाएगा। सरकार ने आकांक्षी जिलों—चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती और बहराइच सहित 34 जिलों के 100 विकासखंडों में सभी पदों पर शत-प्रतिशत तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
नीति में मानवीय पहलुओं को भी प्राथमिकता दी गई है। पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर उन्हें यथासंभव एक ही जिले में तैनाती दी जाएगी। दिव्यांग कर्मचारियों और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग आश्रितों वाले कर्मचारियों को स्थानांतरण से छूट दी गई है। वहीं पूर्णतया दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को उनकी सुविधा के अनुसार तैनाती देने का प्रावधान रखा गया है। 31 मई के बाद होने वाले स्थानांतरण केवल मुख्यमंत्री की स्वीकृति से ही संभव होंगे।























































