निपुण भारत मिशन की रणनीति पर कार्यशाला, मुजफ्फरनगर व शामली के अधिकारियों ने की गहन चर्चा

मुजफ्फरनगर। राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा उत्तर प्रदेश लखनऊ के निर्देशों के क्रम में नवीन शैक्षिक सत्र की रणनीतियों पर विचार-विमर्श हेतु निपुण भारत मिशन विज़न एवं रणनीति कार्यशाला का आयोजन होटल वेलविस्टा, दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे-58, कूकड़ा चौराहा, मुजफ्फरनगर में किया गया। इस कार्यशाला का नेतृत्व मुख्य विकास अधिकारी मुजफ्फरनगर कंडारकर कमलकिशोर देशभूषण के निर्देशन में हुआ। कार्यक्रम में मुजफ्फरनगर व शामली जनपद के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, एसआरजी, एआरपी और डायट मेंटर्स ने प्रतिभाग किया।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके उपरांत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि जिले में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत कुल 350 विद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से अक्टूबर व फरवरी में आयोजित दो चरणों में 193 और 157 विद्यालय निपुण घोषित किए गए हैं। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशानुसार “निपुण दिवस” मनाकर प्रत्येक विद्यालय की प्रत्येक कक्षा से कम से कम 10 बच्चों का निपुण असेसमेंट किया जाएगा। इस डाटा को गूगल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखा जाएगा ताकि आगामी निपुण परीक्षा में बच्चों की स्थिति को और बेहतर किया जा सके।राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ से आए वरिष्ठ विशेषज्ञ एस.के. तिवारी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे निपुण हों। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्कूलों की है, क्योंकि यही पहली और आखिरी कड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआरपी को अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 10 विद्यालयों को निपुण करना होगा। इसी तरह शिक्षक संकुल और खंड शिक्षा अधिकारियों को भी अपने-अपने विद्यालयों की जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि कार्य में गतिशीलता लाना आवश्यक है और यह तभी संभव होगा जब सभी का सहयोग और सक्रिय भागीदारी मिलेगी।सलाहकार शिवेश, जुनैद और सौम्या ने निपुण भारत की रणनीतियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की और आगामी शैक्षिक सत्र 2025-26 की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बाल-वाटिका के प्रभावी संचालन, शिक्षक संदर्शिका पर आधारित संरचित शिक्षण, समयबद्ध निपुण विद्यालय लक्ष्य, खंड शिक्षा अधिकारियों और एआरपी के बीच बेहतर समन्वय, टीम भावना से कार्य, शिक्षण संकुल की गुणवत्ता वृद्धि, डिजिटल संसाधनों के अधिकतम प्रयोग और अकादमिक रणनीतियों पर उन्मुखीकरण जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला के दौरान उपस्थित सभी अधिकारियों व विशेषज्ञों से सुझाव भी मांगे गए ताकि आगामी कार्यशालाओं में उन्हें शामिल कर योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।कार्यक्रम के अंत में जिला समन्वयक सुशील कुमार ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, शिक्षकों, मीडिया प्रतिनिधियों और कार्यशाला को सफल बनाने में सहयोग करने वाले जिला परियोजना कार्यालय के समस्त जिला समन्वयक, लेखाकार और कंप्यूटर ऑपरेटरों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन पूर्व एआरपी इरशाद अहमद ने किया। यह कार्यशाला न केवल निपुण भारत मिशन की रणनीतियों को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर बनी बल्कि भविष्य की शैक्षिक गुणवत्ता सुधार योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुई।

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