भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रणनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 19 जनवरी को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। यह दस्तावेज कोई औपचारिक रक्षा संधि नहीं, बल्कि “लेटर ऑफ इंटेंट” यानी आशय पत्र है, जिसे भविष्य में होने वाले विस्तृत रक्षा समझौते की नींव माना जा रहा है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या जंग की स्थिति में UAE भारत के लिए लड़ेगा या दोनों देशों के बीच किसी तरह की सैन्य सुरक्षा गारंटी तय हुई है।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि लेटर ऑफ इंटेंट क्या होता है। LOI किसी भी देश के बीच एक प्रारंभिक दस्तावेज होता है, जिसमें दोनों पक्ष भविष्य में सहयोग बढ़ाने की मंशा जाहिर करते हैं। यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता और न ही इसमें किसी तरह की सैन्य सहायता या युद्ध में साथ देने की अनिवार्यता शामिल होती है। सरल शब्दों में कहें तो यह एक रोडमैप है, जिसके आधार पर आगे चलकर ठोस समझौते किए जा सकते हैं।भारत-UAE के बीच साइन किए गए LOI का फोकस रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग में सहयोग, रक्षा तकनीक का साझा विकास, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी प्रयास और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है, न कि किसी तीसरे देश के खिलाफ सैन्य गठबंधन बनाना।
हाल के महीनों में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते की तुलना भारत-UAE समझौते से की जा रही है। पाकिस्तान-सऊदी समझौते में कथित तौर पर यह प्रावधान है कि अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों पर हमला माना जाएगा। इसी वजह से यह आशंका जताई जा रही है कि क्या भारत और UAE के बीच भी ऐसा ही कोई प्रावधान है। इस पर भारत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है कि भारत-UAE LOI में किसी तरह की म्यूचुअल डिफेंस क्लॉज यानी एक-दूसरे के लिए युद्ध में उतरने की शर्त शामिल नहीं है।भारत की विदेश नीति हमेशा रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रही है। भारत किसी सैन्य गुट का हिस्सा बनने या किसी देश के लिए स्वतः युद्ध में कूदने के सिद्धांत को नहीं मानता। UAE के साथ रक्षा साझेदारी भी इसी सोच के तहत बनाई गई है, जिसमें सहयोग है लेकिन बाध्यता नहीं। UAE भी इसे एक व्यावहारिक और संतुलित साझेदारी के रूप में देखता है।
कुल मिलाकर, भारत और UAE के बीच हुआ लेटर ऑफ इंटेंट यह संकेत देता है कि दोनों देश रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में अपने रिश्ते और गहरे करना चाहते हैं। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि जंग की स्थिति में UAE भारत के लिए हथियार उठाएगा या भारत UAE के लिए। यह साझेदारी सहयोग, समन्वय और साझा हितों पर आधारित है, न कि युद्ध की गारंटी पर। भविष्य में यदि कोई औपचारिक रक्षा समझौता होता है, तो उसके प्रावधानों के आधार पर ही किसी तरह के निष्कर्ष निकाले जा सकेंगे।
भारत-UAE के बीच LOI का मतलब?
भारत और UAE ने जिस LOI पर साइन किए हैं, उसका मकसद भविष्य में एक औपचारिक समझौता तैयार करना है. यह समझौता दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे सैन्य अभ्यास, सेना प्रमुखों के आपसी दौरे और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करेगा.
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि यूएई के साथ LOI पर साइन करने का मतलब यह नहीं है कि भारत क्षेत्रीय संघर्षों में शामिल होगा. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसी देश के साथ रक्षा और सुरक्षा मोर्चे पर हमारी भागीदारी का यह मतलब नहीं है कि हम क्षेत्र के संघर्षों में विशेष रूप से शामिल होंगे. यानी विदेश सचिव के बयान से साफ होता है कि भारत-UAE के बीच एक-दूसरे के लिए जंग लड़ने जैसा कोई समझौता नहीं हुआ है. न तो भारत और न ही UAE हमले की स्थिति में किसी के लिए जंग लड़ेंगे.















