बिजनौर/नजीबाबाद। हरिद्वार-काशीपुर फोरलेन हाईवे पर उत्तराखंड सीमा में वन्य जीव गलियारों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। 42 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वन इलाके में हाथी और अन्य जीवों की आवाजाही के लिए तीन एलिफेंट सहित फोरलेन हाईवे पर सात अंडरपास बनाए जाने हैं।जिसका निर्माण कार्य सितंबर, 2024 तक पूरा हो जाएगा।
हरिद्वार से काशीपुर तक करीब 2200 करोड़ की लागत से हाईवे को फोरलेन किया जाना था। नगीना से काशीपुर तक हाईवे का काम पूरा कर लिया गया था। इसी दूरी में टोल भी वसूला जा रहा है। हरिद्वार से नजीबाबाद के बीच निर्माण में देरी हुई। देरी की एक वजह वन क्षेत्र में वन्य जीवों के लिए सुरक्षित गलियारा मुहैया कराना भी रहा।
शुरुआती प्रोजेक्ट में वन्य जीवों के लिए अंडरपास का प्रावधान नहीं था। बाद में वन विभाग की आपत्ति के बाद 120 करोड़ की लागत से हाथियों के लिए तीन अंडरपास और अन्य छोटे जीवों के लिए तीन और अंडरपास बनाने का प्रस्ताव तैयार हुआ। हाथियों के लिए कुल तीन अंडर बनाए जाने हैं, जिनमें दो की लंबाई पांच-पांच सौ मीटर है, जबकि एक डेढ़ सौ मीटर लंबाई है।
फोरलेन पर सुरक्षित होगा आवागमन
हाथी और अन्य वन्य जीव कभी भी सड़क पर खड़े हो जाते हैं, जिनकी वजह से ट्रैफिक थम जाता है। मनमौजी हाथियों के स्वयं हटने पर ही ट्रैफिक आगे बढ़ पाता है। अंडरपास बनाए जाने के बाद फोरलेन पर सुरक्षित आवागमन होगा। सड़क के ऊपर से यातायात गुजरेगा, जबकि वन्यजीवों की आवाजाही फोरलेन के गलियारों से होती रहेगी।
नजीबाबाद से हरिद्वार के बीच फोरलेन और एलिफेंट गलियारों का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। सितंबर तक वन्यजीव गलियारों का काम पूरा कर लिया जाएगा।















