क्यों मानसून के दौरान कुछ लोगों की स्किन ज्यादा ऑयली हो जाती है?

मानसून के दौरान मौसम सुहावना होता है लेकिन ये अपने साथ कई परेशानियां भी लेकर आता है. बारिश के सीजन कुछ लोगों स्किन से जुड़ी परेशानियां ज्यादा परेशान करती हैं. जिनकी स्किन ऑयली हो उन्हें तो दोगुना नुकसान झेलना पड़ता है. दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. दिपाली भारद्वाज ने बताया कि बारिश की वजह से हवा में नमी बढ़ जाती है. ऐसे में स्किन में सीबम का प्रोडक्शन बढ़ जाता है. जिनकी स्किन पहले से ऑयली होती है उन्हें इस कंडीशन में परेशानियां ज्यादा झेलनी पड़ती है. इसलिए ऑयली स्किन वालों को सलाह दी जाती है कि इस मौसम में ज्यादा केयर करनी चाहिए.मानसून में ऑयल का प्रोडक्शन बढ़ जाए और इसे कंट्रोल न करें तो पोर्स तक बंद हो जाते हैं. ऐसे में पिंपल्स या एक्ने भी होने लगते हैं. एक्सपर्ट से जानें इस प्रॉब्लम से कैसे बचा जा सकता है. साथ ही किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए.

स्किन ऑयली क्यों हो जाती है? What is Oily skin

अगर किसी की बॉडी में सीबम प्रोडक्शन ठीक से नहीं हो पाता है तो एक्स्ट्रा ऑयल बनने लगता है. सीबम के बनने में सेबेशियस ग्लैंड्स का रोल अहम है. इसके कार्य क्षमता ठीक न हो तो सीबम जरूरत से ज्यादा बनने लगता है. ऑयल, धूल-मिट्टी और पॉल्यूशन की वजह से पोर्स बंद हो जाते हैं. इस कारण एक्ने और पिंपल की दिक्कत भी होने लगती है. यहीं एक्ने-पिंपल डार्क स्पॉट्स बन जाते हैं.

मानसून में ऑयली स्किन पर ज्यादा खतरा

हवा में नमी का ज्यादा होना- लगातार बारिश की वजह से हवा में ह्यूमिडिटी बढ़ जाती है. इसे सड़ी गर्मी कहा जाता है और ये इस वजह से स्किन पर चिपचिपापन ज्यादा महसूस होता है.

सेबेशियस ग्लैंड्स का एक्टिव होना- सेबेशियस ग्लैंड्स के लिए बताया जाता है कि गर्म और नम मौसम में ये ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं. ऐसे में सीबम का प्रोडक्शन बढ़ता है. यही एक्स्ट्रा ऑयल चेहरे पर चिपचिपाहट की वजह बनता है.

पसीना और ऑयल- बारिश के मौसम में शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है. जब एक्स्ट्रा ऑयल और पसीना साथ में स्किन पर जमा होते हैं तो ऑयली फील होता है. अगर धूल, मिट्टी और बैक्टीरिया भी चिपक जाए तो पिंपल्स के होने का डर बढ़ जाता है.

पोर्स का बंद होना- स्किन का ऑयली होना, डेड सेल्स और गंदगी की वजह से पोर्स बंद होते हैं. इसका टाइम से और सही तरीके से ट्रीटमेंट न किया जाए तो बैक्टीरिया बनने लगते हैं. ऐसे में पिंपल्स और एक्ने बनते हैं और स्किन पर डार्क स्पॉट्स हो जाते हैं.

माइक्रोबियम में चेंज- स्किन पर कई फायदे पहुंचाने वाले और नॉर्मल माइक्रोबियम मौजूद होते हैं. एक्स्ट्रा ऑयल और नमी की वजह से इनका बैलेंस बिगड़ने लगता है. कुछ बैक्टीरिया और यीस्ट बढ़ते हैं और इस कारण फंगल इंफेक्शन के होने का डर बढ़ता है.मानसून के मौसम में स्किन को कई नुकसान झेलने पड़ते हैं. इसका ख्याल रखने के लिए महंगे प्रोडक्ट्स पर ज्यादा विश्वास ठीक नहीं है. इसकी जगह आप दाल चीनी, हल्दी, नींबू जैसी देसी चीजों के घरेलू उपायों को भी अपना सकते हैं.

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