ताजमहल, दुनिया के सात अजूबों में से एक, न केवल अपनी खूबसूरती के लिए बल्कि उसकी ज़मीन को लेकर भी विवादों में रहा है। सवाल यह उठता रहा है कि ताजमहल जिस भूमि पर बना है, वह वक्फ की संपत्ति है या इसे मुग़ल शासक शाहजहां ने किसी से खरीदा था।इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार, आगरा में स्थित इस भव्य मकबरे की ज़मीन राजा जय सिंह से ली गई थी। शाहजहां ने ताजमहल के निर्माण के लिए जय सिंह को एक बड़ी हवेली के बदले यह ज़मीन दी थी। यह जानकारी फारसी में लिखे गए 17वीं सदी के दस्तावेज़ों और बाद के रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।
हालांकि कुछ मुस्लिम संगठनों और वक्फ बोर्ड ने यह दावा किया है कि ताजमहल वक्फ संपत्ति है और इसे एक धार्मिक स्मारक के रूप में देखा जाना चाहिए। 2017 में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा भी दाखिल किया था जिसमें कहा गया कि ताजमहल वक्फ की संपत्ति नहीं है और इस पर कोई अधिकार नहीं जताया जा सकता।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, ताजमहल एक राष्ट्रीय धरोहर है और इसकी देखरेख सरकार करती है। ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और कोर्ट में प्रस्तुत प्रमाणों के आधार पर स्पष्ट होता है कि यह भूमि वैध रूप से मुग़ल सम्राट द्वारा प्राप्त की गई थी और इसका वक्फ से कोई सीधा संबंध नहीं है।इस तरह, ताजमहल की ज़मीन को लेकर जो भ्रम हैं, वे ऐतिहासिक साक्ष्यों और सरकारी रिकॉर्ड्स के अनुसार काफी हद तक स्पष्ट हो चुके हैं।















