रूस और अमेरिका के बीच दशकों से तनातनी चल रही है. हाल में दोनों देशों को लेकर एक ऐसा विचार सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया को अचरज में डाल दिया है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत के बाद मॉस्को की ओर से अनोखा प्रस्ताव दिया गया है. ये प्रस्ताव फ्रेंडशिप टनल बनाने का. यह टनल दोनों देशों को जोड़ेगा और दोनों देशों के बीच शांति के पुल के रूप काम करेगा.
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दूत और रूस के आरडीआईएफ सॉवरेन वेल्थ फंड के प्रमुख किरिल दिमित्रिव ने यह प्रस्ताव दिया है. इसे बनाने में 8 अरब डॉलर का खर्च आएगा. इसकी फंडिंग मास्को और “अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों” की जाएगी.
जानें क्या है पुतिन-ट्रंप फ्रेंडशिप टनल
इस परियोजना के तहत तहत आठ सालों से कम समय में 70 मील (112 किलोमीटर) लंबी रेल और कार्गो लाइन का निर्माण किया जाएगा.बेरिंग जलडमरूमध्य, जो अपने सबसे संकरे बिंदु पर 51 मील (82 किमी) चौड़ा है, रूस के विशाल और कम आबादी वाले चुकोटका क्षेत्र को अलास्का से अलग करता है. इन्हें जोड़ने के विचार कम से कम 150 वर्षों से चल रहे हैं.

छोटे डायोमीड द्वीप, जिनमें से एक रूसी और एक अमेरिका का है, जलडमरूमध्य के बीच में, केवल 2.4 मील (4 किमी) की दूरी पर स्थित हैं.
किरिल दिमित्रिव ने अमेरिका को दिया है प्रस्ताव
किरिल दिमित्रिव ने अमेरिका-रूस संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार काम किया है. रूस को इस बाबत तैयार भी कर लिया है. गुरुवार देर रात यह विचार तब रखा जब पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और यूक्रेन में युद्ध रोकने का रास्ता तलाशने के लिए बुडापेस्ट में मिलने पर सहमति व्यक्त की.मस्क की ‘बोरिंग कंपनी’ को इसके निर्माण के लिए नाम प्रस्तावित किया गया है. दिमित्रिव द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि बेरिंग जलडमरूमध्य के माध्यम से अमेरिका-रूस संपर्क का सपना एक स्थायी दृष्टिकोण को दर्शाता है . 1904 के साइबेरिया-अलास्का रेलमार्ग से लेकर रूस की 2007 की योजना तक यही विचार था. आरडीआईएफ ने अमेरिका-कनाडा-रूस-चीन रेलमार्ग सहित मौजूदा प्रस्तावों का अध्ययन किया है.
मस्क की कंपनी को जिम्मेदारी!
उन्होंने लिखा कि अमेरिका और रूस, अमेरिका और एफ्रो-यूरेशिया को पुतिन-ट्रंप सुरंग से जोड़ा जाए. यह एक 70 मील लंबी कड़ी जो एकता का प्रतीक होगी. पारंपरिक लागत $65 बिलियन से अधिक है, लेकिन बोरिंग कंपनी की तकनीक इसे 8 बिलियन डॉलर तक कम कर सकती है.

दिमित्रिव ने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ संबंध स्थापित किए हैं और सुझाव दिया है कि अमेरिकी ऊर्जा कंपनियां आर्कटिक में रूसी परियोजनाओं में शामिल हो सकती हैं. उन्होंने प्रस्ताव दिया कि सुरंग का निर्माण द बोरिंग कंपनी द्वारा किया जाए, जो एक अमेरिकी सुरंग निर्माण कंपनी है और जिसका स्वामित्व अमेरिकी अरबपति और कभी ट्रंप के सहयोगी रहे एलन मस्क के पास है।सुरंग के अलावा, जलडमरूमध्य के दोनों ओर बुनियादी ढांचे के निर्माण और उन्नयन पर भारी खर्च आएगा. चुकोटका में मौजूदा सड़कें और रेलमार्ग काफी खराब स्थिति में हैं.
शीत युद्ध के दौरान भी बनी थी योजना
शीत युद्ध के दौरान जलडमरूमध्य पर “कैनेडी-ख्रुश्चेव विश्व शांति पुल” बनाने की योजना बनाई गई थी. उन्होंने उस दौर का एक स्केच पोस्ट किया जिसमें उस मार्ग का जिक्र था जिस पर यह पुल बनाया जा सकता था, साथ ही एक ग्राफिक भी था जिसमें नई सुरंग के रास्ते को दिखाया गया था.उनका कहना है कि आरडीआईएफ ने पहले ही रूस-चीन रेलमार्ग पुल में निवेश करके उसे बना लिया है. अब समय आ गया है कि और ज्यादा काम किया जाए और मानव इतिहास में पहली बार महाद्वीपों को जोड़ा जाए. रूस और अमेरिका को जोड़ने का समय आ गया है.















