कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने केंद्र सरकार द्वारा वक्फ कानून में किए जा रहे संशोधनों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे “सुधार नहीं, अधिकारों पर प्रहार” करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इसे सुधार के रूप में पेश कर रही है, लेकिन हकीकत में यह अल्पसंख्यकों के संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों पर सीधा हमला है। सिंघवी ने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों को लेकर बनाए जा रहे नए प्रावधानों से वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी और सरकार को संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण मिल जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह संशोधन केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए भी खतरा है। उनका कहना है कि सरकार को अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, न कि उनकी धार्मिक संस्थाओं को कमजोर करना चाहिए। सिंघवी ने इस मुद्दे को संसद में भी मजबूती से उठाने की बात कही और जनता से अपील की कि वे इन बदलावों के पीछे की नीयत को समझें। उन्होंने चेताया कि यदि ऐसे कानूनों को बिना विरोध के लागू होने दिया गया, तो यह एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी।















