सहारनपुर में अग्निशमन नियमों का उल्लंघन: क्या प्रशासन इंतजार कर रहा है

भास्कर न्यूज़ उत्तर प्रदेश उत्तराखंड।

सहारनपुर में अग्निशमन नियमों का उल्लंघन: क्या प्रशासन इंतजार कर रहा है नगर में होटलो एवं रेस्टोरेंटो द्वारा लगभग सभी नियम ताक पर रख कर व्यापार किया जा रहा है। शासन के द्वारा बनाये गए नियमो की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। अग्निशम विभाग मोनधारण किये हुए है। ऐसा प्रतीत होता है की शासन को किसी बड़ी अनहोनी का इन्तजार है। कारवाही के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।

हाल ही में पटना रेलवे स्टेशन के ठीक सामने होटल में लगी आग के कारण हुई दुर्घटना जिसमे 6 से लोगो की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस द्वारा अग्निशमन से रिपोर्ट मांगी गई है। सहारनपुर के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं। गत माह आग लगने की तीन से चार दुर्घटनाये हुई हैं। जिनकी सूचना मिलने के बाद विभाग द्वारा आवश्यक कारवाही कि जाती है। आग जितनी जल्दी बुझा दी जाये इसी पर विभाग के कर्मचारियों का पूरा दबाव रहता है। जिसमे अग्निशमन के कर्मचारियों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है। स्मार्ट सिटी कहे जाने वाले सहारनपुर कि सड़को पर जहाँ एक तरफ दो पहिया वाहनों के निकलने का रास्ता भी नहीं बच पाता ऐसे में अग्निशमन कि भारी भरकम गाड़ियों को लाने एवं ले जाने में जो परेशानी होती है उसका हाल विभाग के अलावा किसी के अनुभव में नहीं है। परन्तु प्राय देखा जाता है कि जहाँ जहाँ बीते दिनों आग लगने कि सूचना प्राप्त हुई है लगभग उन सभी भवन स्वामियों के द्वारा अपने भवन में अग्निशमन विभाग द्वारा बनाये गए नियमो का पालन नहीं किया गया था। ऐसे में उनके ऊपर विभागीय कारवाही भी कि जानी चाहिए परन्तु बड़ा सवाल यह है कि विभागीय कारवाही आग लगने के पश्चात ही क्यों कि जानी चाहिये। नगर क्षेत्र में हजारो ऐसे निर्माण हैं जो बिना अग्निशम विभाग कि अनापत्ति पत्र के ही इस्तेमाल में लाये जा रहे हैं। कई ऐसे रेस्टोरेंट हैं जिनके द्वारा अग्निशमन के एक भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा। दिखावे के लिए मात्र फायर सिलेंडर रख लिए गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन हर बार कि तरह इस बार भी किसी बड़ी घटना का इन्तजार कर रहा है। मामला सहारनपुर नगर क्षेत्र के बहुत ही भीड़ भाड़ वाले इलाके चिलकाना रोड का है। जो क्षेत्र पुरे दिन जाम से जूझता रहता है। जहाँ एक अवैध फैमली रेस्टोरेंट संचालित किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो भवन स्वामी द्वारा अपने घर में ही रेस्टोरेंट खोल दिया गया है। जिसकी शिकायत विकास प्राधिकरण में भी की गई जिसमे अधिकारीयों द्वारा कोई नया निर्माण न होना बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया। मिली जानकारी के अनुसार इस रेस्टोरेंट के अंदर जाने का मात्र एक ही रास्ता है जो सीढ़ियों से होकर जाता है। प्रथम तल पर एकांत में बैठने का भी इंतजाम किया गया है। निगम द्वारा एक फ़ूड लाइसेंस लेने के बाद यह सञ्चालन किया जा रहा है। रेस्टोरेंट संचालित किये जाने के लिए जितने भी अनापत्तिपत्र चाहिए उनके नाम पर केवल सिफर दिखाई पड़ता है। यदि इस तरह के रेस्टोरेंट के अंदर कोई ऐसा हादसा होता है तो यकिनक कई निर्दोष लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा जिन सीढ़ियों से ग्राहक इस रेस्टोरेंट में प्रवेश करते हैं उसके अलावा नीचे वापस आने का कोई आक्समिक द्वार भी नहीं बनाया गया है। बड़ा सवाल यह है कि विभाग द्वारा ऐसे रेस्टोरेंट पर पहले से ही कारवाही क्यों नहीं कि जाती। मिली जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा ऐसे प्रतिष्ठानों को मात्र एक नोटिस देकर खाना पूर्ति कर दी जाती है। जिससे आने वाले समय में यदि कोई हादसा हो भी तो विभाग के ऊपर कोई आंच न आ पाए ऐसे में आला अधिकारियो को ऐसे भवनों कि जांच समय समय पर करनी चाहिए जो पूर्णतः नियमो के विरुद्ध जाकर सिर्फ धन कमाने के लालच में सावधानी बरतने को नज़र अंदाज़ कर रहे हैं। जिनके लिए किसी कि जान कि कोई कीमत नहीं रह जाती है।

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