चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक में हुई इस घटना ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। हंगामे की वजह से नगर निगम के सदन की गरिमा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अनिल मसीह को “वोट चोर” कहने पर विवाद शुरू हुआ और बात हाथापाई तक पहुंच गई। मसीह ने इसके जवाब में राहुल गांधी, संजय गांधी और अरविंद केजरीवाल का जिक्र करते हुए कहा कि ये सभी जमानत पर हैं, जो चर्चा को और भड़काने का कारण बना। मसीह द्वारा कांग्रेस पार्षद के हाथ से पोस्टर छीनकर फाड़ने की घटना ने इस विवाद को और उग्र बना दिया।
यह घटना राजनीतिक असहमति के समाधान के लिए संवाद और सहिष्णुता की कमी को दर्शाती है। नगर निगम जैसी संस्थाओं में इस तरह के विवाद आम जनता के बीच नकारात्मक संदेश भेजते हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में संबंधित प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।























































