पंजाब में परिवहन विभाग की हड़ताल के दौरान हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। बुधवार को संगरूर में उस समय स्थिति अचानक बिगड़ गई जब पंजाब रोडवेज, पनबस और पंजाब रोड ट्रांसपोर्ट कंपनी (PRTC) यूनियन के प्रदर्शनकारी कर्मचारियों और पुलिस के बीच तीखा टकराव हो गया। इसी दौरान प्रदर्शन कर रहे समूह पर गंभीर आरोप लगा है कि उन्होंने गाड़ी रोककर तैनात थाना प्रभारी (SHO) पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद टीम ने SHO को तुरंत बचाया, लेकिन घटना में उन्हें चोटें आईं। इस हमले ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है और पुलिस प्रशासन सतर्क मोड में आ गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पीआरटीसी के 10 कर्मचारियों समेत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हत्या के प्रयास (IPC 307) सहित कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हड़ताल के दौरान कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। SHO पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का प्रयास केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं, बल्कि सीधा-सीधा पुलिसकर्मी की जान को खतरे में डालने जैसा कृत्य है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, यूनियन नेताओं ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि हड़ताल शांतिपूर्ण थी, लेकिन पुलिस ने जबरन कर्मचारियों को हटाने की कोशिश कर तनाव बढ़ाया। उनका दावा है कि कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप राजनीतिक दबाव में गढ़े गए हैं और वे इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। परिवहन यूनियनों की हड़ताल का असर पूरे पंजाब में देखा जा रहा है, जहां बस सेवाएं बुरी तरह बाधित हो गई हैं। आम यात्री कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और कई रूटों पर सेवाएं ठप हो गई हैं।
घटना के बाद संगरूर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। राज्य सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों से बातचीत के संकेत दिए हैं, लेकिन SHO पर हमले जैसी गंभीर घटनाओं ने पैसेंजर सेफ्टी और लॉ एंड ऑर्डर को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और प्रदर्शनकारी पक्ष भी अपनी स्थिति स्पष्टीकरण के साथ पेश करने की तैयारी कर रहा है।















