मुजफ्फरनगर। जनपद में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना साइबर क्राइम पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइबर अपराधियों को कमीशन पर म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपियों के बैंक खातों के माध्यम से साइबर अपराध से संबंधित 80 लाख रुपये से अधिक का लेन-देन किया गया था। इस कार्रवाई से साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।
यह कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन और पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र के निर्देशन में तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में की गई। पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ और थाना साइबर क्राइम प्रभारी सुल्तान सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम लगातार साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा विकसित ऑनलाइन पोर्टल “प्रतिबिम्ब” पर जनपद मुजफ्फरनगर से संबंधित कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें फर्जी कॉल कर लोगों से धोखाधड़ी करने की जानकारी दी गई थी।
इन शिकायतों की जांच के दौरान थाना साइबर क्राइम पुलिस को पता चला कि साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए जा रहे कुछ बैंक खाते मुजफ्फरनगर में संचालित हो रहे हैं। इसके आधार पर थाना साइबर क्राइम में मुकदमा अपराध संख्या 11/2026 धारा 318(4), 336, 338 बीएनएस तथा 66सी और 66डी आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान पहले तीन अभियुक्तों नदीम पुत्र मेहबान, गुफरान पुत्र मुस्तफा निवासी ग्राम कुटेसरा थाना चरथावल और मुख्य अभियुक्त मयूर अफजल राणा पुत्र नौशाद राणा निवासी ग्राम सूजडू थाना खालापार को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
आगे की विवेचना के दौरान पुलिस को दो और ऐसे लोगों के बारे में जानकारी मिली जो साइबर अपराधियों को कमीशन लेकर अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। 22 अप्रैल 2026 को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इन दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके पास से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़े संपर्क और लेन-देन के लिए किया जाता था।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है। साइबर क्राइम पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के माध्यम से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की रकम विभिन्न खातों के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर की जाती थी। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है।















