मुजफ्फरनगर में पगड़ी दस्तारबंदी समारोह, 16 छात्राओं ने पूरी की मोलवियत शिक्षा.

मुजफ्फरनगर। चिल्ड्रन हैप्पी होम इंटर कॉलेज में आयोजित पगड़ी दस्तारबंदी का भव्य कार्यक्रम शिक्षा, संस्कार और बेटियों के सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया। इस खास मौके पर छात्राओं ने अपनी मेहनत और लगन से उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया। कार्यक्रम में डॉक्टर इसरार सैफी की पुत्री नरगिस परवीन सहित कुल 16 छात्राओं ने मोलवियत की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूर्ण की। इन छात्राओं में से एक ने मुफ्ती की उच्च धार्मिक शिक्षा भी हासिल की, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

कार्यक्रम का आयोजन बेहद गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में धार्मिक विद्वान, गणमान्य लोग, अभिभावक और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। मंच से वक्ताओं ने छात्राओं की इस सफलता की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और शिक्षा के माध्यम से समाज में नई मिसाल कायम कर रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक और आधुनिक शिक्षा का संतुलन समाज को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।समारोह के दौरान बागपत से आए हज़रत शाह बिल्ला साहब ने विशेष दुआ कराई, जिसमें सभी छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य, बेहतर स्वास्थ्य और निरंतर सफलता की कामना की गई। दुआ के समय पूरे माहौल में आध्यात्मिक ऊर्जा और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिला। छात्राओं और उनके परिजनों के चेहरों पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था।

विद्यालय प्रबंधन ने इस अवसर पर कहा कि यह उपलब्धि केवल छात्राओं की नहीं, बल्कि पूरे संस्थान और समाज की सफलता है। उन्होंने अभिभावकों का भी आभार जताया, जिन्होंने अपनी बेटियों को शिक्षा दिलाने में पूरा सहयोग दिया। प्रबंधन ने यह भी कहा कि भविष्य में भी संस्थान इसी तरह बेटियों को आगे बढ़ाने और उन्हें बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।अभिभावकों ने भी अपनी बेटियों की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और सही मार्गदर्शन मिलने पर वे हर चुनौती को पार कर सकती हैं। इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देने का काम करते हैं और अन्य परिवारों को भी अपनी बेटियों की शिक्षा के प्रति प्रेरित करते हैं।यह समारोह केवल एक शैक्षिक उपलब्धि का उत्सव नहीं था, बल्कि बेटियों के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और समाज में उनकी बढ़ती भूमिका का प्रतीक भी बना। कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि यदि अवसर और समर्थन मिले, तो बेटियां हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।

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