मुजफ्फरनगर। कस्बा बुढ़ाना के शंकर पैलेस में आज पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय सत्यपाल मलिक की स्मृति में एक श्रद्धांजलि शोकसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कस्बे और क्षेत्र के गणमान्य लोग, जनप्रतिनिधि, किसान नेता, विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आम जनता मौजूद रही। सभी ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और योगदान को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा में पहुंचे सांसद हरेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि सत्यपाल मलिक का पूरा जीवन जनता और किसानों की सेवा को समर्पित रहा। वे हमेशा अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े रहे। सांसद ने दुख जताया कि सरकार ने इतने बड़े नेता और पूर्व राज्यपाल होने के बावजूद उनके निधन के बाद अपेक्षित राजकीय सम्मान नहीं दिया। उन्होंने इसे केवल सत्यपाल मलिक ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र और देश की राजनीतिक परंपराओं का अपमान बताया।
समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष ज़िया चौधरी ने भी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक बड़े नेता के निधन के बाद उन्हें वह सम्मान नहीं दिया गया, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा कि सरकार की यह मानसिकता दर्शाती है कि विरोधी विचारधारा वाले नेताओं को वह मरने के बाद भी उचित सम्मान नहीं देती।
जाट संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि सत्यपाल मलिक ने जीवन भर किसानों और समाज के दबे-कुचले वर्गों की लड़ाई लड़ी। उनकी निडरता और स्पष्टवादिता उन्हें आम नेताओं से अलग करती थी। लेकिन उनके निधन के बाद जिस प्रकार उपेक्षा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा, वह किसी भी रूप में उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह रवैया लोकतांत्रिक परंपराओं को धूमिल करता है।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी सत्यपाल मलिक की सादगी, साफगोई और ईमानदारी को याद करते हुए कहा कि वे किसानों के सच्चे हमदर्द थे। उनका व्यक्तित्व आज की राजनीति के लिए एक मिसाल है और उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। कार्यक्रम को राकेश शर्मा, कपिल मलिक, सम्राट चौधरी, अतहर चौधरी और आसिफ कुरैशी सहित कई लोगों ने संबोधित किया।















