मुजफ्फरनगर में TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का मशाल जुलूस,

मुजफ्फरनगर। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर जनपद में सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सेवारत शिक्षकों पर लागू की जा रही TET (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने गवर्नमेंट इंटर कॉलेज, महावीर चौक से कचहरी तक मशाल जुलूस निकालकर अपनी नाराजगी जताई और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। जुलूस में शामिल शिक्षक हाथों में मशाल और तख्तियां लेकर चल रहे थे, जिन पर “सेवारत शिक्षकों को TET से छूट दो” जैसे नारे लिखे थे।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से शिक्षा सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर अचानक TET अनिवार्यता थोपना पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के चलते देशभर के करीब 12 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उनकी नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि जो लोग लंबे समय से पढ़ा रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं, उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर करना उनकी गरिमा और अनुभव का अपमान है।जुलूस के बाद शिक्षकों ने कचहरी पहुंचकर प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को TET अनिवार्यता से छूट प्रदान की जाए। साथ ही सरकार से यह भी अनुरोध किया गया कि इस संबंध में जल्द से जल्द अध्यादेश लाकर नियमों में संशोधन किया जाए, ताकि हजारों शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

इस आंदोलन में अटेवा, टीचर सेल्फ केयर टीम (TSCT), प्राथमिक शिक्षक संघ, भारतीय किसान यूनियन (शिक्षक प्रकोष्ठ), उर्दू शिक्षक एवं कर्मचारी संघ, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ सहित कई शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में शामिल रहे। सभी संगठनों ने एकजुट होकर सरकार से इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाने की अपील की।प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने चेतावनी भी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों के भविष्य का मामला है। शिक्षकों ने सरकार से न्यायपूर्ण निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि उनकी वर्षों की सेवा और अनुभव को देखते हुए उन्हें राहत दी जानी चाहिए, न कि नई शर्तों के बोझ तले दबाया जाना चाहिए।

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