टमाटर की कीमतों में अक्टूबर की भारी बारिश के चलते पिछले 10-15 दिनों में लगभग 50% की तेज़ वृद्धि देखी गई है। देशभर के विभिन्न राज्यों में खुदरा टमाटर की कीमतों में पिछले एक महीने में 25% से लेकर 100% तक उछाल आया है।
महाराष्ट्र – जो टमाटर की आपूर्ति का प्रमुख क्षेत्र है – वहां थोक दरों में 45% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि दिल्ली, जो उत्तर भारत का सबसे बड़ा वितरण केंद्र है, वहां कीमतें 26% तक बढ़ गईं।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, 19 अक्टूबर से 19 नवंबर के बीच पूरे भारत में औसत खुदरा मूल्य 27% बढ़कर ₹36 प्रति किलो से ₹46 प्रति किलो तक पहुंच गया है। चंडीगढ़ में टमाटर की कीमतों में सबसे तेज़ 112% वृद्धि देखी गई, वहीं आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में मासिक वृद्धि 40% से अधिक रही। कई स्थानों पर शानदार गुणवत्ता वाले टमाटर अब ₹80 प्रति किलो तक बिक रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, शादी के मौसम और साल के अंत में होने वाले उत्सवों की वजह से मांग बनी रहने के कारण कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
टमाटर की मौजूदा कीमतें: क्षेत्रवार विश्लेषण
- महाराष्ट्र में थोक दरें 45% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं।
- दिल्ली की मंडी में कीमतें 26% तक वृद्धि के साथ उच्चतम स्तर पर हैं।
- खुदरा कीमतें औसतन ₹46 प्रति किलो हो गई हैं, जबकि उच्च गुणवत्ता के टमाटर ₹80/kg तक बिक रहे हैं।
- चंडीगढ़, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मासिक बढ़ोतरी 40-112% तक रही है।
मांग व आपूर्ति की स्थिति
मांग में इज़ाफ़ा मुख्यतः शादी व उत्सव-सीजन के कारण देखा गया, इसके विपरीत भारी बारिश की वजह से टमाटर की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। देश भर की मंडियों में आने वाले ट्रकों की संख्या आधी रह गई, विशेषकर कर्नाटक, महाराष्ट्र व गुजरात से दिल्ली के आजादपुर बाजार में टमाटर की आवक घट गई। किसानों की फसलें बारिश में बर्बाद हो गई हैं, जिससे आपूर्ति संकट और बढ़ा है।
महंगाई पर असर
पिछले महीने टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में तेज़ गिरावट आने पर खुदरा महंगाई दर सिर्फ 0.25% रही, जो 2013 के बाद सबसे कम स्तर था। उस समय अक्टूबर में टमाटर में मुद्रास्फीति -42.9% थी, प्याज में -54.3% और आलू में -36.6%। लेकिन आपूर्ति बाधित होने से अब महंगाई फिर से बढ़ने लगी है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार अब खुदरा दरों में फिर से तेज़ वृद्धि आ रही है, जिससे आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ सकता है।
बाजार की प्रतिक्रिया और भविष्य
मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मौसम में सुधार नहीं आया तो फसल की आपूर्ति सामान्य होने में वक़्त लगेगा और कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। आगामी शादी-सीजन और बड़े त्योहारों के कारण माँग में तेजी रहेगी। सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरी हस्तक्षेप किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, भारी बारिश के कारण टमाटर की फसलें बर्बाद होने और आपूर्ति कम होने से देश के प्रमुख राज्यों में कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपभोक्ता फिलहाल महंगे दामों पर टमाटर खरीदने को मजबूर हैं, और किसानों को झेलना पड़ रहा है फसल बर्बादी और बाजार अस्थिरता का असर।















