केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन बड़े फैसले: जनगणना-2027 का बजट मंजूर, ‘कोलसेतु’ नीति लागू, और कोपरा-MSP को हरी झंडी

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में  देश से जुड़े तीन अहम फैसलों को मंजूरी दी गई, जिनका सीधा असर प्रशासनिक तैयारियों, ऊर्जा क्षेत्र और किसानों की आय पर पड़ेगा। सबसे महत्वपूर्ण फैसला देशव्यापी जनगणना-2027 को लेकर लिया गया है। सरकार ने इसके लिए 11,718 करोड़ रुपये के विशाल बजट को मंजूरी प्रदान की है, जिससे जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक, सटीक और तकनीक आधारित बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यह बजट डिजिटल डेटा कलेक्शन, मोबाइल ऐप आधारित सर्वे, जनगणना कार्यबल की ट्रेनिंग और डेटा सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में खर्च किया जाएगा। कैबिनेट का यह कदम अगले दशक की योजनाओं, नीतियों और संसाधन आवंटन के लिए अहम आधार तैयार करेगा।

दूसरा बड़ा फैसला कोयला लिंकिंग नीति में बड़े सुधार को लेकर है। सरकार ने नई और पारदर्शी नीति ‘CoalSETU’ (कोलसेतु) को हरी झंडी दी है, जिसका उद्देश्य कोयले की सप्लाई को सुचारू और निष्पक्ष बनाना है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कोलसेतु के तहत अब कोई भी घरेलू खरीदार लिंकिंग ऑक्शन में हिस्सा ले सकेगा, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और औद्योगिक इकाइयों को स्थिर कोयला आपूर्ति मिल सकेगी। इसके अलावा, कोल लिंकिंग होल्डर अब 50% तक कोयले का निर्यात कर सकेंगे, जो उद्योगों को वैश्विक बाजार में अवसर देगा। हालांकि बाजार में किसी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए ट्रेडर्स को ऑक्शन में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी, ताकि कोयले की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता बनी रहे और कीमतों की अनावश्यक बढ़ोतरी न हो सके।

बैठक में तीसरा बड़ा निर्णय कोपरा-2026 (Copra) सीजन के लिए MSP पर नीतिगत अनुमति देने का है। यह फैसला नारियल किसानों के हित में बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि कोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर होने वाले इस नीतिगत अनुमोदन से नारियल उत्पादकों को बाजार में उचित कीमत सुनिश्चित मिलेगी और उनकी आय में स्थिरता आएगी। कोपरा उत्पादन से जुड़े किसान लंबे समय से बढ़ते लागत मूल्य और बाजार में अस्थिर भावों की समस्या का सामना कर रहे थे, जिसके समाधान के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इन तीनों फैसलों से जहां एक ओर देशव्यापी प्रशासनिक तैयारी मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र, विशेषकर नारियल किसानों को आर्थिक सुरक्षा और बेहतर आय का समर्थन मिलेगा। कुल मिलाकर, कैबिनेट की यह बैठक आगामी वर्षों के विकास ढांचे और आर्थिक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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