मुजफ्फरनगर। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा देशभर में किसानों की फार्मर रजिस्ट्री तैयार करने का अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में किसान खतौनी में नाम और अंश निर्धारण से जुड़ी त्रुटियों के कारण इस प्रक्रिया से वंचित रह गए हैं। राजस्व अभिलेखों में मौजूद इन गलतियों के चलते किसानों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई किसान रियल टाइम खतौनी में दर्ज त्रुटियों के कारण अपनी फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में बाधा उत्पन्न हो रही है।
किसानों का कहना है कि फार्मर रजिस्ट्री न होने की स्थिति में उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित होने का खतरा है। इसके अलावा खतौनी में नाम अथवा अंश की गड़बड़ी के कारण किसान कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) तथा अन्य कृषि संबंधी सुविधाओं का लाभ भी नहीं ले पा रहे हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।हाल ही में राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि 1 जून से जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगी, उन्हें रासायनिक खाद उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। इस निर्णय ने उन किसानों की चिंता और बढ़ा दी है, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों के कारण अब तक नहीं बन पाई है। किसानों का कहना है कि वे पिछले करीब दो वर्षों से अपनी खतौनी में नाम और अंश की गलतियों को ठीक कराने के लिए तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन राजस्व विभाग की धीमी कार्यप्रणाली के कारण इन समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हो पा रहा है।
किसानों के अनुसार विभागीय लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। खतौनी में त्रुटियां होने के कारण वे कृषि निवेश, बैंक ऋण और कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर आगामी फसल चक्र और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका है।किसानों ने मांग की है कि सरकार इस गंभीर विषय का संज्ञान लेकर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दे कि प्रत्येक गांव में विशेष राजस्व चौपाल आयोजित कर खतौनी में नाम और अंश निर्धारण से संबंधित त्रुटियों का अभियान चलाकर अधिकतम एक माह के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई तो किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो सकेगी और वे सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर प्राप्त कर सकेंगे।















