BNS की वो धाराएं, जिनके तहत ट्रस्ट के कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुई FIR

अयोध्य्या के राम मंदिर चंदा विवाद में पहली बार FIR दर्ज किए जाने के बाद नामजद सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. इससे पहले इन आरोपियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था. यह FIR श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज की गई है

यह कार्रवाई चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आरोपों की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर की गई. FIR में नामजद लोग जिसमें अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश पांडे, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ ​​टिन्नू यादव, मंदिर में चंदे के तौर पर मिले कैश और कीमती सामान की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े थे. इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच के तहत उनसे पूछताछ की जा रही है.

क्या कहता धारा 306, कितनी सजा

चंदा चोरी मामले में भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज एफआईआर में कई धाराएं लगाई गई हैं. BNS की धारा 305 कुछ खास संवेदनशील या सुरक्षित जगहों पर की गई चोरी से जुड़ा है, जैसे रिहायशी घर, परिवहन के साधन (गाड़ियां या ट्रेन) या फिर पूजा-स्थल. यह एक संज्ञेय (cognizable) और गैर-जमानती अपराध माना जाता है, और 7 साल तक की अधिकतक जेल और जुर्माना हो सकता हैइसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 305, धारा 306 (मालिक के कब्जे वाली संपत्ति की क्लर्क या नौकर द्वारा चोरी), 316 (आपराधिक विश्वासघात), 317 (बेईमानी से चोरी का सामान लेना), धारा 3 (5) और 61 (आपराधिक साजिश) के तहत, अन्य प्रावधानों के साथ दर्ज किया गया है.

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 306 के तहत, किसी क्लर्क, नौकर या कर्मचारी द्वारा अपने नियोक्ता की संपत्ति या उनके कब्जे में मौजूद संपत्ति की चोरी करना एक संज्ञेय (cognizable) और गैर-जमानती अपराध माना जाता है. मामला साबित होने पर जुर्माने के साथ-साथ 7 साल तक की सजा भी मिल सकती है.

BNS की धारा 316 में कितनी सजा

धारा 316 में ‘भरोसा तोड़ने का अपराध’ (Criminal Breach of Trust) माना जाता है और इसके लिए सजा भी तय किया गया है. इस प्रावधान की उप-धारा (5) उन लोगों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करती है जो बहुत भरोसे वाले पदों पर होते हैं, जैसे कि सरकारी कर्मचारी, बैंकर, व्यापारी, वकील या एजेंट. दोषी पाए जाने की सूरत में 5 साल तक की जेल हो सकती है, साथ में जुर्माना भी लगाया जा सकता है या फिर दोनों ही सजा मिल सकती है. जबकि उप-धारा (5) में 10 साल की जेल की सजा तय की गई है.

जबकि धारा 317 चोरी की संपत्ति को अपने पास रखने, उसे हासिल करने और उसके निपटान से जुड़े कानूनों को परिभाषित करती है. इसे इंडियन पीनल कोड (IPC) की पुरानी धारा 411 की जगह लाया गया. अपराध की गंभीरता के आधार पर इस धारा के तहत 3 साल की जेल की सजा से लेकर कठोर आजीवन कारावास तक की कड़ी सजा का प्रावधान करती है.

धारा 317 और धारा 61 में क्या

धारा 317 (4) उन आदतन अपराधियों के लिए है जो चोरी की संपत्ति का लेन-देन करते हैं या उसे हासिल करते हैं. अपराध सिद्ध होने पर इसके तहत 10 साल तक की जेल या फिर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है. जेल की सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लग सकता है. जबकि 317 (5) के तहत चोरी का सामान छिपाने या उससे छुटकारा पाने में जान-बूझकर मदद करने के दोषी पाए जाने पर जुर्माना और जेल दोनों हो सकता है. अधिकतम 3 साल की जेल की सजा मिल सकती है.

BNS की धारा 61 में आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) रचने वालों की परिभाषा तय की गई है. इस केस में गंभीर साजिश में होने की स्थिति में मौत की सजा, उम्रकैद या 2 साल या उससे अधिक की कड़ी सजा हो सकती है. इसमें साजिश करने वालों को उसी तरह सजा दी जाएगी जिस तरह से उन्होंने अपराध के लिए उकसाया हो. जबकि मामूली साजिश के मामले में छह महीने तक की जेल और जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं.

अल नीनो का हाथ नहीं, फिर क्यों आग की भट्टी बन गया यूरोप?

प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट का भी केस

इसके अलावा प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 13 (1) (a) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. इसके तहत यदि अपराध का आरोप लगाया जाता है, तो आरोप में उस संपत्ति का वर्णन देना अनिवार्य होगा जिसके संबंध में अपराध किए जाने का आरोप है और उन तारीखों का जिक्र करना होगा जिनके बीच अपराध किए जाने का आरोप है. इसके तहत, दोषी पाए जाने पर कर्मचारी को कम से कम चार साल और अधिक से अधिक 10 साल तक की कठोर सजा हो सकती है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

मंदिर में चंदा चोरी का विवाद 7 जून को सामने आया था. इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी, जिसने 23 जून को प्रदेश सरकार को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी. SIT की सिफारिशों के आधार पर कल गुरुवार को 25 जून की रात FIR दर्ज की गई थी और अयोध्या पुलिस ने आज शुक्रवार को आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की.

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts