भारत ने 1 जुलाई से कमर्शियल खरीदारों के लिए पेट्रोल और डीजल की रिटेल बिक्री पर लगी पाबंदियां हटा ली हैं। ये पाबंदियां मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण ग्लोबल एनर्जी ट्रेड में रुकावट के दौरान घरेलू फ्यूल सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए इमरजेंसी उपायों के तौर पर लगाई गई थीं।इस कदम का सीधा सा मतलब यह है कि 1 जुलाई से व्यावसायिक खरीदार (जैसे बस/ट्रक मालिक) पेट्रोल पंपों से सीधे खुदरा दरों पर तेल खरीद सकेंगे, जिससे उनकी लागत घटेगी।
200 लीटर रोज की तय थी सीमा
सरकार ने कमर्शियल यूजर्स को रिटेल आउटलेट्स से फ्यूल खरीदने से रोक दिया था। डीजल की बिक्री को प्रति कस्टमर या गाड़ी के लिए 200 लीटर प्रति दिन तक सीमित कर दिया था। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि इलाके में तनाव से सप्लाई चेन पर खतरा मंडरा रहा था। स्थानीय स्तर पर कमी की चिंता बढ़ गई थी।
जून में लागू की गई इन पाबंदियों का मकसद पेट्रोल और डीजल की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना, फ्यूल के गलत इस्तेमाल और जमाखोरी को रोकना और सही कीमतों पर बिना रुकावट फ्यूल सप्लाई बनाए रखना था।
हालात सामान्य होने के साथ उठाया गया कदम
हालात सामान्य होने के साथ ही अब ये पाबंदियां हटा ली गई हैं। इससे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर और इंडस्ट्रियल यूजर्स जैसे कमर्शियल कंज्यूमर बिना किसी मात्रा की सीमा के रिटेल आउटलेट्स से फिर से फ्यूल खरीद सकेंगे।जून का आदेश रिटेल फ्यूल और बल्क सप्लाई के बीच कीमतों में बढ़ते अंतर के कारण जारी किया गया था। ट्रकिंग कंपनियों समेत कमर्शियल कंज्यूमर सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से चलाए जा रहे रिटेल आउटलेट्स से फ्यूल खरीदने लगे थे। कारण था कि वहां डीजल बल्क सप्लाई पॉइंट्स की तुलना में काफी सस्ता था।डीजल भारत की फ्यूल मांग का लगभग 40% हिस्सा है। इंडस्ट्रियल यूजर्स को रिटेल कीमतों से लगभग 40 रुपये प्रति लीटर ज्यादा कीमत पर बेचा जा रहा था। इससे कीमतों में अंतर (आर्बिट्रेज) पैदा हुआ। इसके कारण देश के कई हिस्सों में फ्यूल स्टेशनों पर सप्लाई का दबाव बढ़ गया।
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पाबंदियां हटाने के मायने समझिए
रिटेल मांग में अचानक बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर सरकारी रिटेलर्स – इंडियन ऑयल कॉर्प, भारत पेट्रोलियम कॉर्प और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प – पर पड़ा। ये तीनों मिलकर भारत के 1,00,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों में से लगभग 90% का संचालन करते हैं। इस दौरान, प्राइवेट रिटेलर्स (जो मार्केट रेट के करीब फ्यूल की कीमत रखते थे) की डीजल बिक्री में भारी गिरावट आई, जबकि सरकारी आउटलेट्स पर बिक्री में काफी बढ़ोतरी हुई।रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के नेट एक्सपोर्टर भारत ने ये अस्थायी पाबंदियां इसलिए लगाई थीं ताकि देश भर में फ्यूल की बिना रुकावट उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। कारण था कि जियोपॉलिटिकल तनाव ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में खलल डाल दिया था।पाबंदियां हटाने का मतलब है कि सरकार का मानना है कि घरेलू फ्यूल सप्लाई सामान्य हो गई है। अब इमरजेंसी पाबंदियों की जरूरत नहीं है।















