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मुज़फ्फरनगर। क्रांतिकारी शालू सैनी ने माथे पर भस्म लगाकर की थी प्रतिज्ञा आस पास के क्षेत्रों तक नहीं जाने देगी किसी भी मृतक को। लावारिस के रूप में विधि विधान से देती है वारिस बनकर अंतिम बिदाई संसाधनों के आभाव में अपनी स्कूटी से लेजाकर गंगा में विसर्जित की अस्थियां। हजारों लावारिस लाशों को अपना नाम देकर अंतिम संस्कार करने वाली लावारिसों की वारिस क्रांतिकारी शालू सैनी ने आज फिर गंगा में अस्थियों का विसर्जन किया। जनपद की रहने वाली सामाजिक कार्यों को कर एक नई अलख जगा रही क्रांतिकारी शालू सैनी आज पड़ोसी राज्यों में भी लावारिसो की वारिस के नाम से मशहूर हो गई है। क्रांतिकारी शालू सैनी ने सामाजिक कार्यों को अपनी जिम्मेदारी समझकर निभाया है। दिन हो या रात किसी समय सामाजिक कार्यों को करने से पीछे नहीं हटी।क्रांतिकारी शालू सैनी ने बताया की उन्होंने करोना के समय अपने माथे पर लावारिस की बहन बनकर उसकी भस्म को अपने माथे पर लगाकर प्रतिज्ञा की थी की आस पास के राज्यो तक वो किसी भी मृतक को लावारिस के रूप में नही जाने देगी इसी प्रतिज्ञा को निभाने के लिए वो दिन रात लगी है इस सेवा में उन्होंने जनता से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा है की अब वो अकेले इस सेवा को नही कर सकती उन्हे जनता के सहयोग की जरूरत है।















