चित्तौड़गढ़, वीरता और बलिदान की भूमि, जहां हर साल रंग तेरस पर होली खेलने की अनूठी परंपरा निभाई जाती है। यह परंपरा 25 फरवरी 1568 को मुगल शासक अकबर के आक्रमण और राजपूतों द्वारा खेली गई रक्त की होली की स्मृति में मनाई जाती है। इस दिन चित्तौड़गढ़ में अवकाश रहता है और पूरा शहर रंगों में सराबोर हो जाता है।
होली बाजार में नई वैरायटी की धूम
चित्तौड़गढ़ में होली के त्योहार को लेकर बाजारों में रंग, गुलाल और पिचकारियों की धूम मची हुई है। रंग और गुलाल के होलसेल व्यापारी गोपाल पटवा ने बताया कि इस साल हर्बल गुलाल और हर्बल रंगों की मांग अधिक है। बड़ी कंपनियों के इस व्यवसाय में उतरने से हाईटेक पिचकारियों की कई वैरायटी बाजार में उपलब्ध हैं।
क्रिकेट थीम वाली पिचकारियों की बढ़ी मांग
इस बार बच्चों के लिए क्रिकेट खिलाड़ियों की फोटो वाली पिचकारियां, मुखौटे और आर्टिफिशियल बाल जैसी नई वैरायटी आ चुकी हैं। भारत द्वारा हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के कारण क्रिकेट थीम वाले उत्पादों की मांग काफी बढ़ गई है।















