करीब छह दशक से अपनी ही जमीन पर हक के इंतज़ार में जी रहे भारत-नेपाल सीमा पर बसे थारू जनजाति के लोगों और मियांपुर में बसाए गए बांग्लादेशी विस्थापित परिवारों का लंबा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है।शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद जिले में पहुंचकर हजारों परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक सौंपेंगे।मुख्यमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट पर है। अफसर दिन-रात एक कर रहे हैं ताकि कार्यक्रम में कोई कमी न रह जाए और जमीनी हकीकत पर कोई सवाल खड़ा न हो।
एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर बसे थारू जनजाति के 24 गांवों के करीब चार हजार से अधिक परिवारों को भूमि का वैध अधिकार दिया जाएगा। वहीं मियांपुर में बसाए गए बांग्लादेशी विस्थापितों के लगभग 300 से ज्यादा परिवारों को भी उनकी जमीन का मालिकाना हक मिलेगा।जमीन का अधिकार मिलने के बाद ये परिवार अब न केवल अपनी जमीन पर कानूनी रूप से मालिक बनेंगे, बल्कि बैंक से लोन लेने, मकान बनाने और जमीन के अन्य उपयोग में भी सक्षम हो सकेंगे। अब तक कागजों में नाम न होने के कारण ये सभी सुविधाएं उनसे दूर थीं मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही गांवों में उत्साह चरम पर है। दशकों से लंबित मांग पूरी होने की उम्मीद में लोगों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है। कार्यक्रम स्थल से लेकर गांवों तक साफ-सफाई, सजावट और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि मुख्यमंत्री के सामने कोई खामी न आए।
उधर, दशकों से जमीन पर हक के इंतजार में जी रहे मियांपुर के विस्थापित परिवारों के लिए अब बड़ी राहत की खबर है। 11 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित दौरे में 156 परिवारों को उनकी कृषि भूमि का मालिकाना हक मिलने जा रहा है।पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से 1964 में विस्थापित होकर आए इन परिवारों को बसाने के बाद सरकार ने प्रति परिवार 4.75 एकड़ भूमि तो दी, लेकिन मालिकाना हक न होने के कारण न तो वे जमीन बेच सकते थे और न ही उस पर बैंक से ऋण ले पा रहे थे।
दुश्वारी: नहीं पहुंच रहा हर-घर नल से पानी
मियांपुर गांव में जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पाइपलाइन होने के बावजूद अधिकांश घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है। कई जगह पाइप लाइनें लटकी हुई हैं और टोटियां सूखी पड़ी हैं। गांव की महिलाओं का कहना है कि पिछले छह महीने से शिकायत के बावजूद पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ।ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे से पहले ग्रामीणों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अधिकारी कार्यक्रम की तैयारियों और सजावट में जुटे हैं, लेकिन जमीनी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्राम प्रधान मिथुन ढाली ने भरोसा दिलाया है कि गांव की सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाएगा।















