ईरान और सीरिया के रिश्तों में तेजी से बढ़ती दूरी हालिया घटना में साफ नजर आई। इजराइली अखबार मआरिव के मुताबिक, सीरियाई सरकार ने इस हफ्ते ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी अली लारिजानी के विमान को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इसके चलते लारिजानी को इराक और तुर्की के रास्ते से होकर लेबनान पहुंचना पड़ा। यह कदम दोनों देशों के बिगड़ते रिश्तों का अहम संकेत माना जा रहा है। पिछले साल के अंत में सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को हटाए जाने के बाद नए राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने ईरान की सैन्य मौजूदगी को अस्थिरता पैदा करने वाला करार दिया था। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना सीरिया के नए राजनीतिक रुख और बदलते क्षेत्रीय समीकरणों की झलक देती है।
लेबनान क्यों पहुंचे लारिजानी
अली लारिजानी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी हैं. वो बुधवार को लेबनान की राजधानी बेरूत पहुंचे. यहां उन्होंने राष्ट्रपति जोसेफ औन, संसद अध्यक्ष नबिह बेरी और हिजबुल्लाह के वरिष्ठ नेता नाइम कासिम से मुलाकात की. हालांकि, लेबनान के राष्ट्रपति औन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में किसी भी समूह को हथियार नहीं रखने चाहिए और विदेशी सहायता लेने पर रोक होनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि लेबनान के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
केसे रिश्तों में खटास पड़ी
सीरिया और ईरान दशकों से करीबी सहयोगी रहे हैं, खासकर सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान, जब ईरान ने असद सरकार को सैन्य और आर्थिक मदद दी थी. लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद से दमिश्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब अपने क्षेत्र में बाहरी सैन्य उपस्थिति को सीमित करना चाहता है. अली लारिजानी के विमान को रोका जाना इस बदले हुए रुख का सबसे ठोस उदाहरण है, जो आने वाले समय में मध्य पूर्व की कूटनीतिक समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है.























































