फरीदाबाद में आज से 39वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला-2026 की शुरुआत हो गई है। यह प्रतिष्ठित मेला 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश की कला, संस्कृति और हस्तशिल्प की रंगीन दुनिया एक साथ देखने को मिलेगी। करीब 45 एकड़ क्षेत्र में फैले इस मेले में 1200 से अधिक शिल्पी हिस्सा ले रहे हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र की पारंपरिक और आधुनिक कलाकृतियों का प्रदर्शन करेंगे। हर साल की तरह इस बार भी सूरजकुंड मेला भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहा है।इस वर्ष मेले के थीम राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय हैं। उत्तर प्रदेश की ओर से लकड़ी की नक्काशी, पीतल के बर्तन, जरी-जर्दोजी, चिकनकारी और मिट्टी के बर्तन आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं मेघालय अपनी अनोखी जनजातीय कला, बांस और केन से बने उत्पाद, पारंपरिक वस्त्र और हस्तनिर्मित आभूषणों के जरिए पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक झलक दिखा रहा है। इन दोनों राज्यों के विशेष पवेलियन में लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जा रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस बार मिस्र को पार्टनर देश के रूप में चुना गया है। मिस्र के स्टॉल्स में वहां की प्राचीन सभ्यता से जुड़ी कलाकृतियां, पिरामिड से प्रेरित सजावटी वस्तुएं, हस्तनिर्मित आभूषण और पारंपरिक कपड़े प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य देशों के शिल्पी भी मेले में शामिल हुए हैं, जिससे यह आयोजन वास्तव में वैश्विक स्वरूप ले चुका है।सूरजकुंड मेला सिर्फ हस्तशिल्प तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां देशभर के पारंपरिक व्यंजनों का भी स्वाद लिया जा सकता है। अलग-अलग राज्यों के फूड कोर्ट में राजस्थानी, दक्षिण भारतीय, उत्तर भारतीय, पूर्वोत्तर और अंतर्राष्ट्रीय खानपान के स्टॉल लगाए गए हैं। इसके साथ ही रोजाना सांस्कृतिक मंच पर लोक नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियां दर्शकों को मनोरंजन के साथ सांस्कृतिक अनुभव भी दे रही हैं।
मेले तक पहुंचने के लिए दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से विशेष बस सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। दिल्ली मेट्रो के जरिए भी सूरजकुंड तक पहुंचना आसान है, जहां से शटल बसें चलाई जा रही हैं। निजी वाहन से आने वालों के लिए पार्किंग की समुचित व्यवस्था की गई है। सुरक्षा, स्वच्छता और दर्शकों की सुविधा के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं।कुल मिलाकर सूरजकुंड मेला-2026 कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और खानपान का एक ऐसा भव्य उत्सव है, जो हर उम्र के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यह मेला न केवल शिल्पकारों को वैश्विक मंच देता है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दिलाता है।















