बिहार वोटर लिस्ट संशोधन मामले पर आज होगी ‘सुप्रीम’ सुनवाई, जानें आखिर मामले पर क्यों मच रहा हल्ला

पटना/नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) के कथित गड़बड़ी और मनमाने ढंग से संशोधन को लेकर मचा सियासी घमासान अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े तक पहुंच चुका है। आज सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मामले पर अहम सुनवाई करने जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव से पहले ‘मतदाता अधिकारों के साथ खिलवाड़’ बताया है, जबकि राज्य निर्वाचन कार्यालय ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।

क्या है मामला?

बिहार के कई जिलों में मतदाता सूची के अद्यतन (रिवीजन) के दौरान लाखों नामों को हटाए जाने और नए नाम जोड़ने में कथित अनियमितता के आरोप लगे हैं। कांग्रेस, राजद और वाम दलों ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने अपने लाभ के लिए वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ कराई है। इन दलों का दावा है कि अल्पसंख्यक और दलित समुदायों के मतदाताओं के नामों को बड़ी संख्या में हटाया गया है।

क्यों बढ़ा विवाद?

यह मामला तब गरमा गया जब निर्वाचन आयोग द्वारा प्रकाशित एक प्रारंभिक सूची में कई मतदाताओं ने पाया कि उनका नाम सूची से गायब है। इसके बाद जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें पूरे प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और अंतिम सूची को फिलहाल लागू न करने की मांग की गई।

सुप्रीम कोर्ट में क्या होगी सुनवाई?

आज सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि संशोधित वोटर लिस्ट को रद्द कर नया सर्वेक्षण कराया जाए। अदालत तय करेगी कि क्या इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए या नहीं। साथ ही, कोर्ट यह भी देखेगा कि क्या मतदाता अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

सरकार और निर्वाचन आयोग का पक्ष

बिहार सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि वोटर लिस्ट में संशोधन पूरी तरह से नियमों के तहत किया गया है। आयोग का कहना है कि जिनके नाम छूटे हैं, वे दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के तहत सुधार करवा सकते हैं।

सियासी असर

बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और ऐसे में वोटर लिस्ट का यह विवाद बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर जनआंदोलन छेड़ने की तैयारी में है।

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