सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता की दिशा में एक अहम पहल करते हुए सोमवार को अपने कई न्यायाधीशों की संपत्ति से जुड़ी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी। यह फैसला उस समय आया है जब कुछ महीने पहले न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर कथित ‘कैश कांड’ के आरोप लगे थे, जिसने न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस विवाद के बाद देशभर में मांग उठी थी कि उच्च न्यायालयों के जजों की संपत्ति सार्वजनिक की जाए ताकि जनता का विश्वास न्यायपालिका पर बना रहे। सुप्रीम कोर्ट की इस पहल को न्याय प्रणाली में भरोसा बढ़ाने और पारदर्शिता कायम रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। वेबसाइट पर प्रकाशित जानकारी में जजों की चल-अचल संपत्तियों, निवेश और आय के स्रोतों का विवरण शामिल है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह पहल स्वैच्छिक है और इसका उद्देश्य जनता के सामने ईमानदारी और निष्पक्षता का उदाहरण प्रस्तुत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अन्य संवैधानिक संस्थाओं को भी इसी दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है।















