दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। शहर के ऊपर धुंध की मोटी परत छाई हुई है, जिसके कारण आम लोगों की दिनचर्या से लेकर स्वास्थ्य तक पर बड़ा असर पड़ रहा है। मंगलवार सुबह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 341 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे साफ है कि हवा में जहरीले कणों की मात्रा इतनी अधिक है कि सामान्य व्यक्ति के लिए भी बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति बवाना और जहांगीरपुरी जैसे औद्योगिक और घनी आबादी वाले इलाकों की है, जहां AQI 400 के पार पहुंच गया है। यह स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है, जिसमें प्रदूषण का असर न केवल अस्थमा, एलर्जी और सांस की बीमारी वाले लोगों पर होता है, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति भी आंखों में जलन, गले में खराश, सिरदर्द और सांस फूलने जैसी समस्याओं का सामना करने लगते हैं। इन क्षेत्रों में सुबह-सुबह लोगों ने हवा में भारीपन और सांस लेने में कठिनाई महसूस की। स्थानीय लोगों का कहना है कि धुंध के कारण दृश्यता भी कम हो गई है, जिससे सुबह की आवाजाही में परेशानी बढ़ गई।
दिल्ली के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट, हवा की कम गति और प्रदूषण के स्रोतों में कमी न आने के कारण यह स्थिति और ज्यादा बिगड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की दिशा और स्पीड में कमी से प्रदूषक कण जमीन के पास ही ठहर जाते हैं। इसी वजह से हवा लगातार जहरीली बनी हुई है। साथ ही, सर्दी की शुरुआत में तापमान नीचे जाने पर प्रदूषक ऊपर उठने के बजाय जमीन के पास ही जमा होते रहते हैं, जिससे स्मॉग बनता है। वर्तमान हालात में कई इलाकों में यही स्मॉग मोटी परत बनाकर शहर की हवा को और ज्यादा दूषित कर रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में निर्माण कार्य, वाहनों से निकलने वाला धुआं, कचरा जलाना, औद्योगिक गतिविधियां और पड़ोसी राज्यों से आने वाला पराली धुआं—ये सभी कारण मिलकर प्रदूषण को खतरनाक स्तर पर पहुंचा रहे हैं। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि इस स्तर का प्रदूषण लोगों के फेफड़ों पर लंबे समय तक असर छोड़ सकता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि ऐसे समय में लोग सुबह-शाम बाहर जाने से बचें, एन-95 मास्क पहनें, पानी का सेवन अधिक करें और घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। वहीं, सरकार भी हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू किए गए कुछ प्रतिबंधों को सख्ती से पालन कराने की तैयारी कर रही है।कुल मिलाकर, दिल्ली-एनसीआर इस समय वायु प्रदूषण के गंभीर संकट से जूझ रहा है। अगर मौसम में सुधार न हुआ या प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं।















